जेल, सियासी हार और कुर्की ने रिज़वान ज़हीर के परिवार को तो’ड़ा, आगे के लिए अब क्या..

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद रिज़वान ज़हीर इस समय जेल में हैं. उनकी बेटी और दामाद भी जेल में हैं. फ़िरोज़ पप्पू की हत्या में परिवार का नाम जब आया तो लगा कि अब रिज़वान ज़हीर का राजनीतिक पतन हो गया. ऐसा लगने लगा कि रिज़वान का सियासी सूरज ढल गया लेकिन हाल ही में जब चुनाव हुए थे तो रिज़वान की बेटी ज़ेबा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर 50 हज़ार से अधिक वोट हासिल किए.

उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कम ही निर्दलीय प्रत्याशी रहे जो इतने वोट पाए और मुक़ाबले में रहे. भले ज़ेबा को चुनाव में जीत नहीं मिली लेकिन ये बात साफ़ हो गई कि अभी भी रिज़वान ज़हीर परिवार का जलवा क्षेत्र में क़ायम है. लोग तो यहाँ तक कहने लगे कि अगर सपा ने ज़ेबा को टिकट दिया होता तो जीत ज़ेबा की ही होती.

चुनाव ख़त्म हो गए और न ही ज़ेबा जीतीं और न ही ज़ेबा की राजनीतिक पार्टी सपा की सरकार बनी. पिछले कुछ दिन से ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन रिज़वान ज़हीर पर कोई और भी कार्यवाई कर सकता है. इस बात की ख़बर ख़ुद रिज़वान परिवार को भी लग गई थी. परिवार में हलचल देखी जा सकती थी.

परिवार को ये ख़बर लग चुकी थी कि सरकार उनकी प्रॉपर्टी पर बुलडोज़र चलवा सकती है या फिर कुर्क कर सकती है. आज सुबह इस तरह की ख़बरें आने लगीं कि पूर्व सांसद की तुलसीपुर प्रॉपर्टी को कुर्क किया जा रहा है. रिज़वान समर्थकों को इस ख़बर ने दुःख दिया वहीं रिज़वान विरोधी गुट ने इसे इन्साफ़ की लाठी कहा.

इस ख़बर के बाद से शहर में इसी बात की चर्चा हर जगह है. परिवार इसको द्वेष की कार्यवाई बता रहा है और न्याय के लिए कोशिश करने की बात कर रहा है. वहीं परिवार के सूत्रों की मानें तो रिज़वान ज़हीर के राजनीतिक समूह के लोग इसको लेकर कोई राजनीतिक पहल भी कर सकते हैं. विधानसभा चुनाव में ज़ेबा की ओर से जज़्बाती मुद्दे उठाये गए थे जिसकी वजह से उन्हें जनता का समर्थन भी मिला था.

अब रिज़वान ज़हीर की प्रॉपर्टी पर हुई इस कार्यवाई के बाद परिवार इसे भी राजनीतिक तौर पर उठा सकता है. उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में महज़ दो साल का समय है और रिज़वान श्रावस्ती लोकसभा सीट से सपा के टिकट की उम्मीद लगा रहे हैं. ये सभी मुद्दे आने वाले लोकसभा चुनाव में असर दिखा सकते हैं.

जनता का एक पक्ष भी रिज़वान के प्रति सहानुभूति रखती है. भले मीडिया और रिज़वान विरोधी रिज़वान को बाहुबली मानते हों लेकिन जो रिज़वान समर्थक है उनको उनकी हर बात पसंद रहती है. ऐसे में रिज़वान इन सभी बातों को अपनी राजनीति में इस्तेमाल कर सकते हैं.

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