नई दिल्ली. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला को नज़रबंद रखने की अवधि को बढ़ा दिया गया है. प्रशासन ने उन्हें 3 महीने और नज़रबंद रखने का फ़ैसला किया है. पब्लिक सेफ्टी एक्ट के अतंर्गत उन्हें अगस्त सेनज़रबंद रखा गया है. उनके अलावा उनके बेटे और पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को भी नज़रबंद किया हुआ है.

जम्मू कश्मीर के कई और नेताओं को भी प्रशासन ने नज़रबंद किया हुआ है. जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलावों के बाद प्रशासन ने राज्य में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे. हालांकि बाद में उन प्रतिबंधों को एक एक कर हटा दिया गया. लेकिन इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं कश्मीर में अब भी बाधित हैं. प्रशासन का कहना है कि जल्द ही इन प्रतिबंधों को भी हटा दिया जाएगा.

उधर जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं. हालांकि किसी भी तरह ही अनहोनी के कारण सुरक्षा व्यवस्था में अब भी ढिलाई नहीं दी गई है.जम्मू कश्मीर में बाज़ार और स्कूल सामान्य ढंग से खुल रहे हैं. सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज शुरू हो गया है. लेकिन प्रशासन ने वहां के स्थानीय नेताओं को अभी बाहर निकलने की छूट नहीं दी है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के जजों अपनी रिपोर्ट में प्रशासन के उस दावे को सही नहीं पाया है, जिसमें कहा गया था कि अगस्त के बाद लगे प्रतिबंधों के बाद प्रशासन ने नाबालि’गों को हिरासत में ले लिया था. जजों ने राज्य की सभी जेलों का दौरा कर रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में कोई भी नाबालिग नहीं मिला है.

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