अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर में 310 ब्लॉकों में 24 अक्टूबर को मतदान हुआ था। कुल 1,092 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। जिनमें से 27 को निर्विरोध चुना गया। पूरे राज्य ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। जिससे राज्य में 98 फ़ीसदी की रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई।

जम्मू कश्मीर और लद्दाख में 217 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। जिनमें से बीजेपी के उम्मीदवारों की जीत की संख्या 100 भी पार नहीं कर सकी। पूरे राज्य में बीजेपी के सिर्फ 81 उम्मीदवार ही जीत का स्वाद चख सके। बता दें कि जम्मू कश्मीर के इतिहास में पहली बार ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के चुनाव हुए थे। लेकिन,अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुए पहले ही चुनाव में बीजेपी को ज़ोरदार झटका लगा है।

बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले जम्मू क्षेत्र में भी बीजेपी को दो तिहाई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। जम्मू क्षेत्र की कुल 148 सीटों में से बीजेपी को सिर्फ़ 52 सीटों पर ही जीत हासिल हुई है। इस क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 88 सीटों पर क़ब्ज़ा जमाया है। जबकि 8 सीटों पर पैंथर्स पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं।

पुंछ ज़िले में तो सभी 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने क़ब्ज़ा जमा लिया। कठुआ, सांबा, और उधमपुर में भी बीजेपी को निराश ही होना पड़ा है। सूत्रों से प्राप्त ख़बरों के अनुसार कश्मीर घाटी में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। कुल 128 सीटों पर हुए चुनाव में उम्मीदवारों ने क़ब्ज़ा जमा लिया और बीजेपी को सिर्फ़ 18 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है।

कुल मिलाकर जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद बीजेपी के द्वारा किए गए दावे खोखले साबित हो रहे हैं। और कश्मीर घाटी से बीजेपी का सफाया होता है साफ दिखाई दे रहा है। अगर आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो कश्मीर के पांचों ज़िलों कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गांदरबल, श्रीनगर और कुलगाम में बीजेपी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। इन ज़िलों की सभी 50 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई हैं। बता दें कि इन चुनावों का कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने बहिष्कार करते हुए इनमें हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया था।

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