जौनपुर की सभी 9 विधानसभा सीटों से मुस्लिम प्रत्याशी ग़ायब,सपा के बायकाट की सुगबुगाहट…

जिला जौनपुर की 9 सीटों में सबसे चर्चित सदर विधानसभा को लेकर ऑलमोस्ट बहस खत्म हो चुकी है सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले में मन बना लिया है इस सीट पर भी समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई मुस्लिम कैंडिडेट नहीं होने जा रहा है, टिकट को लेकर मौर्य समाज में तेज बहादुर मौर्या पप्पू मौर्य जैसे दो नेता सबसे चर्चित रहे लेकिन कहानी और पटकथा 6 महीने पहले लिखी जा चुकी थी जब स्वामी प्रसाद मौर्य और राजभर बंधुओं का आना तय हो गया था उसी वक्त दीदारगंज के साथ जौनपुर सदर की सीट पर भविष्य का भी का भी फैसला हो चुका था माना जा रहा है कि सीट से एक बड़े नेता द्वारा समर्थित उदयभान मौर्या की एंट्री हो चुकी है और टिकट लगभग उनका तय है जिनका जौनपुर की राजनीत से कोई संबंध नहीं रहा है न ही उनका राजनीतिक छात्र युवा संघर्ष से कोई संबंध रहा है!

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव उनसे जुड़े रणनीतिकार गठबंधन के वोटों के सहारे सरकार बनाने की राह देख रहे हैं लेकिन क्या यह बात मान ली जानी चाहिए कि हर जिले में मुसलमानों के लाखो वोटो को नजरअंदाज करके क्या समाजवादी पार्टी सरकार बनाने की ताकत रखती है? सदर में तकरीबन एक लाख से ऊपर मुस्लिम है जो फैसला सदर जौनपुर के लिए होना जो होने जा रहा है जानकार बताते हैं कि यह बहुत घातक बनने वाला है, पूर्व में मलहनी विधानसभा भी मुस्लिम वोटो के बल पर ही सपा जीत पाई थी,यह तय है की अगर आज सरकार समाजवादी सरकार नहीं बन पाती है और मुसलमानों में जो चार्म समाजवादी पार्टी के लिए हमेशा से रहा है वह नदारद होता है उम्मीद बहुत कम है कि अगले 20 साल में समाजवादी पार्टी की सरकार दोबारा सत्ता में आए!

सभी जानते हैं कि मुस्लिम और यादव समाज समाजवादी पार्टी के कोर वोटर रहे और हमेशा उसे दूसरे वर्गों का थोड़ा-थोड़ा वोट मिलता रहा है जिसे सरकार बनती रहे लेकिन यादव समाज के प्रतिनिधित्व में कोई कमी तो देखने को नहीं मिल रही है लेकिन सहारनपुर के इमरान मसूद से लेकर कन्नौज के ताहिर हुसैन आजमगढ़ की दीदारगंज सीट को सींचने वाले आदिल शेख और जौनपुर सदर में मुस्लिम कैंडिडेट को गायब कर देने से समाजवादी की जौनपुर की हर विधानसभा की मुस्लिम वोटों पर असर पड़ने की गुंजाइश है जानकार बता रहे हैं दीदारगंज के सीट पर आदिल शेख को जौनपुर सदर के नाम पर बहला फुसलाकर टाइम पास कराने का की रणनीति अपनाई जा रही है जिससे वो दीदारगंज को डिस्टर्ब करने का उन्हे वक्त न मिले!

सभी जानते हैं अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित नेता है मुस्लिम समाज उनकी सरकार बनवाना भी चाहता है लेकिन उन्हें बिल्कुल कुबूल नहीं है मुसलमानों का नेतृत्व उनकी क्षमताओं उनकी भागीदारी से कोई कंप्रोमाइज हो. यह जो भी घटनाएं समाजवादी सरकार उनके मुखिया अखिलेश यादव के साथ हो रही है यह सभी जानते हैं कि यह अखिलेश यादव जी के द्वारा शायद तय न हो उनके रणनीतिकार गठबंधन के साथी के साथ मिलकर कुछ ऐसे समाजवादी पार्टी के नेता है जो अपनी अपनी सीटों को बचाने के लिए राजभर और मौर्या वोट की उम्मीद से आखिरी चुनाव लडने के प्रयास में है इसी रणनीति के तहत मुस्लिम प्रतिनिधित्व भागीदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है यह नेतृत्व को समझा दिया गया की मुसलमान लाचार है वोह तो जेब में है वोह कहा जायेंगे!

जब सपा मुखिया ने चुनावी आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर लखनऊ से पूजा शुक्ला इलाहाबाद से संदीप यादव जैसे छात्र नेता को टिकट दिया तो मुस्लिम समाज में भी आशा उम्मीद जगी थी की उन्हे भी शिक्षित, सेकुलर सोबर और संघर्ष से आए हुए युवा टिकट मिल सकता है लेकिन मुसलमानों में सदर जौनपुर मौर्य समाज को देने के इस फैसले से मायूसी देखी जा रही है हो सकता है कि मुसलमान वोट दे दे लेकिन मुसलमानों मे समाजवादी के लिए लगाव गायब होता दिख रहा है जो समाजवादी पार्टी के लिए बहुत ही घातक सिद्ध होने वाला है

जौनपुर सदर को लेकर पहले से ही जिले के विपक्षी नेता समाजवादी पार्टी के मुसलमानों के साथ होने वाले दोयम दर्जे के रवैया को लेकर पहले से हमलावर रहे हैं ऐसा कदम जौनपुर विधानसभा की हर सीट पर असर डालेगा किसी भी मुस्लिम प्रतिनिधित्व के ना होने से जौनपुर की एक-एक सीट से मुसलमान हट जाएगा और भागीदारी सुनिश्चित न होने वोट मांगना बहुत मुश्किल होने वाला है!

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