पिछले कुछ दिनों से मीडिया में ये ख़बर आम है कि जल्द ही प्रशांत किशोर कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए वो 2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति बना रहे हैं। प्रशांत के कांग्रेस में जाने की ख़बर से भाजपा नेताओं के चेहरे पर भी चिंता दिख जाती है।

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभी तक इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। कांग्रेस का प्लान सबसे पहले भाजपा को गुजरात में हराना है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि गुजरात हारते ही भाजपा का किला ढह जाएगा। इसका कारण है कि मौजूदा भाजपा के अधिकतर बड़े नेता गुजरात से आते हैं।

हालाँकि गुजरात विधानसभा चुनाव में जो भी नतीजा रहे प्रशांत किशोर का मुख्य फ़ोकस 2024 लोकसभा चुनाव ही रहेगा। प्रशांत से कांग्रेस की बातचीत अंतिम दौर में चल रही है। आपको बता दें कि प्रशांत देश के जाने माने चुनावी रणनीतिकार हैं।

अब इसी से जुड़ी एक ख़बर बिहार से आ रही है। बिहार के उलझे हुए राजनीतिक समीकरणों की वजह से ऐसी ख़बरें पहले से आती रही हैं कि जदयू नेता नीतीश कुमार भाजपा का दामन छोड़ सकते हैं।

इन्हीं सब अटकलों पर ज़ोर देते हुए बिहार कांग्रेस के विधायक शकील ख़ान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव रणनीतिकार की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी नज़दीकियां हैं. इसीलिए हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द नीतीश कुमार और कांग्रेस के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष पार्टियां एक साथ आ सकती हैं.

शकील ने इसके आगे कहा कि प्रशांत किशोर के पास अनुभव के साथ-साथ डाटाबेस भी है. प्रशांत किशोर पहले JDU में रह भी चुके हैं. इस वजह से उन्हें अच्छे से पता है कि अगर नीतीश कुमार कांग्रेस के साथ आते हैं तो NDA के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है.

शकील ख़ान कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि देर-सवेर प्रशांत किशोर नीतीश को कांग्रेस के नज़दीक ले आएँगे।शकील कहते हैं कि कांग्रेस पहले भी कहती आई है कि नीतीश कुमार और भाजपा में संबंध अब पहले जैसा नहीं रह गया है. भाजपा नीतीश कुमार को कमजोर करना चाहती है और यह बात नीतीश कुमार भी समझ रहे हैं. कांग्रेस चाहती है कि नीतीश कुमार जैसे सहयोगी अगर कांग्रेस के साथ आ जाएं तो आने वाले लोकसभा चुनाव में NDA को हराया जा सकता है.

असल में एक तरफ़ जहाँ ऐसी ख़बरें हैं कि प्रशांत किशोर कांग्रेस में जाने का पूरा मन बना चुके हैं वहीं नीतीश से भी वो हाल के दिनों में मिले हैं। यही वजह है कि अटकलें तेज़ चल रही हैं। वहीं जदयू नेता नीतीश-प्रशांत की मुलाक़ात पर कह रहे हैं कि ये एक व्यक्तिगत मुलाक़ात थी। परंतु ये भी सच है कि राजनीति में कुछ भी व्यक्तिगत नहीं होता।

एक कारण इन अटकलों का ये भी है कि जदयू और भाजपा के संबंध इस समय अच्छे नहीं हैं। जदयू की सीटें भाजपा से कम हैं लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। बिहार भाजपा के नेता बार बार ये कहते रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा का बनाया जाए। परंतु भाजपा अगर ऐसा कुछ भी करने की कोशिश करेगी तो नीतीश राजद के साथ जा सकते हैं।

कुल मिलाकर गणित ऐसी फँसी है कि जदयू कमज़ोर होने के बाद भी सत्ता में है और अपने हिसाब से फ़ैसले ले सकती है। जदयू कांग्रेस के नज़दीक जाएगी या नहीं ये तो वक़्त बताएगा लेकिन शकील ख़ान के बयान ने सियासी हलचल तो बढ़ा ही दी है।