बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्णाटक में इस समय भाजपा की सरकार है लेकिन ये सरकार बचेगी या नहीं बचेगी इसका निर्णय उपचुनाव के नतीजों के बाद ही होगा. असल में सरकार बनाने के लिए 225 सदस्यों के हाउस में 113 विधायकों का समर्थन चाहिए. परन्तु 17 सीटें रिक्त होने की वजह से हाउस 208 रह गई है. इसमें से 15 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं. ग़ौर करने की बात ये है कि भाजपा के कुल 105 विधायक हैं और एक निर्दलीय का भी समर्थन भाजपा को है.

भाजपा के लिए मुश्किल ये है कि जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है उन पर पहले कांग्रेस-जेडीएस का क़ब्ज़ा रहा है और बाग़ी विधायकों को चुनाव लड़ने का मौक़ा नहीं मिल रहा है. इस वजह से सहानुभूति पूरी तरह से कांग्रेस-जेडीएस के पक्ष में जाएगी. इसके अलावा कांग्रेस को ये भी उम्मीद है कि वरिष्ठ कांग्रेसी नेता डीके शिवकुमार की गिरफ़्तारी के मुद्दे का फ़ायदा भी पार्टी को मिलेगा. भाजपा को भी पता है कि शिवकुमार के ख़िलाफ़ कार्यवाई उसको महंगी पड़ने वाली है.

कर्णाटक में अयोग्य विधायकों के मामले की सुनवाई मंगल के रोज़ उच्चतम न्यायलय में हुई. न्यायलय ने बहस के दौरान कहा,”हम कपिल सिब्बल के कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ अपने आरोपों को दर्ज करने के अनुरोध पर विचार करेंगे। इस टेप में येदियुरप्पा ने विधायकों को प्रभावित करने की बात को स्वीकार किया। इन्हीं विधायकों को बाद में अयोग्य ठहराया गया था।” ये टेप इस समय कर्णाटक की राजनीति में तहलका मचाये हुए है. इस टेप में मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा कथित रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को बाग़ी बनाने की कोशिश की.

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