मुंबई: महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडनवीस और अजीत पवार के गठबंधन की नाकामी के बाद भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता देवेन्द्र फडनवीस को इस पूरे मामले का ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. जहाँ एक समय भाजपा इतनी ख़ुश थी कि केंद्र से लेकर राज्य के नेता अपनी पार्टी के अजीत पवार से गठबंधन करने को ‘मास्टर स्ट्रोक’ बता रहे थे वहीं अब पूरी कहानी पलट चुकी है और दौर शुरू हो गया है आरोप-प्रत्यारोप का.

भाजपा नेता एकनाथ खडसे ने एक बयान देते हुए कहा है कि मेरी व्यक्तिगत राय है कि भाजपा को अजीत दादा पवार से गठबंधन नहीं करना चाहिए.. वो एक बड़े सिचाई घोटाले में आरोपी हैं और उन पर कई तरह के आरोप हैं.. हमें उनके साथ हाथ नहीं मिलाना चाहिए था. भाजपा के नेता हालाँकि इस मामले में अमित शाह का नाम नहीं ले रहे हैं. भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह की तारीफ़ सबसे अधिक हो रही थी जब फडनवीस ने रातोंरात सरकार बना ली थी.

Ajit Pawar- Devendra Fadnavis

भाजपा के राज्य स्तरीय नेता दबी ज़बान में इसे फडनवीस की ग़लती मान रहे हैं. वहीँ फडनवीस ने इस बारे में कहा कि मैं सही समय पर सही काम करूँगा, आप लोग चिंता न करें. अजीत पवार ने आज बड़ा बयान देते हुए कहा कि मैं एनसीपी में हूँ और एनसीपी में ही था..क्या उन्होंने मुझे निकाला..क्या इस तरह की बात आपने सुनी..मैं एनसीपी में हूँ. अजीत पवार के मुद्दे पर एनसीपी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने बयान दिया कि आख़िर में उन्होंने अपनी ग़लती मान ली.

मलिक ने कहा कि ये पारिवारिक मैटर है और (शरद) पवार साहब ने उन्हें माफ़ कर दिया है..वो पार्टी में हैं और उनकी स्थिति किसी तरह से बदली नहीं है. उल्लेखनीय है कि एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने 23 नवम्बर की सुबह उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. अप्रत्याशित घटनाक्रम में उन्होंने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की लेकिन एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने तुरंत ही पार्टी को अपने कण्ट्रोल में कर लिया.

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