महाराष्ट्र में एक बार फिर भाजपा-शिवसेना सरकार बनती दिख रही है लेकिन इस बार उसको पिछली बार की तुलना में सीटें कम मिलती दिख रही हैं. भाजपा-शिवसेना 162 सीटों पर आगे है जबकि पिछली बार उसे 185 सीटें मिली थीं. भाजपा को इस बार 100 सीटें मिलती दिख रही हैं जो पिछली बार की तुलना में 22 कम हैं. शिवसेना को 62 सीटें मिलती दिख रही हैं जो पिछली बार की तुलना में एक कम है.

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन 91 सीटों पर आगे चल रहा है. गठबंधन को पिछली बार 85 सीटें मिली थीं, इस लिहाज़ से वो 6 फ़ायदे में है. एनसीपी को इस बार 50 सीटें मिलती दिख रही हैं जबकि कांग्रेस 41 पर सिमटती दिख रही है. कांग्रेस को 3 सीटों का नुक़सान और एनसीपी को 9 का फ़ायदा है. इस गठबंधन में दो सीटें अन्य दलों को भी मिल रही हैं. सीपीएम को एक और एसडब्ल्यूपी को एक सीट मिलती दिख रही है.

अन्य की बात करें तो वंचित बहुजन अघादी 8 सीटों पर आगे है. बहुजन समाज पार्टी 5 और आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन दो सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. एमएनएस सिर्फ़ एक सीट पर आगे चल रही है. निर्दलीय भी 11 सीटों पर आगे हैं. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में आल इंडिया मजलि ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असद उद्दीन ओवैसी ने बढ़-चढ़ कर प्रचार किया था.

असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी इस बार ज़ोर-शोर से चुनाव में उतरी थी.पार्टी दावा कर रही थी कि वो 5 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतेगी. राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को झटका लगता दिख रहा है. मनसे महज़ एक सीट पर ही बढ़त बना सकी है जो पार्टी के लिए सोचनीय है. यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है कि चुनाव से पहले कई एनालिस्ट कह रहे थे कि एनसीपी अब ख़त्म हो गई है परन्तु जिस प्रकार एनसीपी ने चुनाव में वापसी की है और अपनी सीटों पर भाजपा-शिवसेना को टक्कर दी है उसके बाद ये साफ़ है कि अभी भी शरद पवार का रसूख महाराष्ट्र की राजनीति में क़ायम है.

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