महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। पहले विधानसभा चुनावों की सरगर्मी, और चुनाव जीतने के बाद बीजेपी शिवसेना गठबंधन में मुख्यमंत्री पद को लेकर तनातनी, और आखिरकार महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का लागू होना। और अब एक बार फिर से महाराष्ट्र की राजनीति सुर्खियों में है। और कारण है 22 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र मेयर चुनाव। मुंबई में ढाई-ढाई साल के अंतराल पर मेयर चुना जाता है।

ग़ौरतलब, है कि फरवरी 2017 में बीजेपी के समर्थन से शिवसेना उम्मीदवार विश्वनाथ महादेश्वर मुंबई के मेयर बने थे। जिनका कार्यकाल सितंबर 2019 में समाप्त हो रहा था। लेकिन, मुंबई में विधानसभा चुनावों की वजह से उनका कार्यकाल नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया था। और बता दें कि मुंबई में नागरिकों की सुविधाओं की ज़िम्मेदारी संभालने वाले बीएमसी का मेयर का पद बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

Uddhav Thackeray

इस नगर निगम का बजट कई राज्यों के बजट से भी कहीं ज़्यादा होता है। और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद हासिल करने में नाकाम रही शिवसेना मेयर पद को अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहती। उल्लेखनीय है कि साल 1996 से ही महाराष्ट्र के मेयर पद पर शिवसेना का कब्ज़ा रहा है। इस बीच एनसीपी की तरफ़ से शिवसेना के लिए एक ख़ुशी की ख़बर आ रही है क्योंकि एनसीपी का कहना है कि मेयर चुनाव में अगर शिवसेना चाहेगी तो एनसीपी शिवसेना को अपना समर्थन देने को तैयार है। क्योंकि शिवसेना ने बीजेपी से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं। तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने महाराष्ट्र में मेयर के चुनाव के मुद्दे पर अपनी रणनीति को ज़ाहिर नहीं किया है।

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