बिहार में नितीश कुमार की सरकार है. यूँ तो सरकार को हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का समर्थन है. हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने युवाओं को पांच हजार देने की मांग उठाकर मांझी ने नया पाशा फेंक दिया है. जीतनराम मांझी की इस मांग से सरकार सकते में आ गई है क्युकी अब विपक्ष के पास नया मुद्दा होगा और सरकार यह बात नहीं मानती है तो नीतीश कुमार को जबाब देते नहीं बनेगा.

कोरोना काल में भी जीतन राम मांझी ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखकर सरकार को अपनी पार्टी के वादे याद दिला रहे हैं. “जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर कहा कि वित्तीय संकट से जूझ रहे हमारे बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए उनकी पार्टी हम ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि हमारी सरकार बनी तो उन्हें 5000 रुपये बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध करता हूं कि सूबे के बेरोजगार युवक/युवतियों को 5000 रुपये बेरोजगारी भत्ता दें.”

सरकार से सीधे बात करने के बजाय उन्होंने मीडिया में इस बात को उछाला है. मांझी के इस मांग को कई लोग लालू कि रिहाई का असर बता रहे है. कुछ लोगों का मानना है कि लालू ने अपना चाल चलना शुरू कर दिया है. तो क्या मांझी लालू के प्लान का हिस्सा है. मांझी की ओर से यह मांग ऐसे समय उठाई गई है, जिस समय हर कोई कोरोना महामारी से जूझ रहा है.

कोरोनाकाल में व्यवस्थाओं को लेकर हैरान दिख रही नीतीश सरकार बिहार के सामने सभी युवक -युवतियों को हर महीने पांच हजार रुपए देने की मांग कर मांझी ने सरकार की परेशानी और बढ़ा दी है. हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब मांझी ने इस तरह की बात सामने रखी है. इसके पहले भी राज्य में लॉकडाउन लगाने के फैसले पर भी उन्होंने गरीबों के हितों की बात उठाकर एक तरह से सरकार के रुख से अलग अपनी राय दी थी.

वहीं पप्पू यादव की गिरफ्तारी के मसले पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए थे. मांझी के हालिया रुख पर नजर डाले तो मांझी नीतीश कुमार से खुश नहीं लग रहे है. मांझी को सरकार में ज्यादा भाव नहीं मिल रहा है शायद यही कारन है कि मांझी लगातार मीडिया में इस तरह का बयान दे रहे हो. खैर देखिये अब इसपर बीजेपी और जदयू का क्या प्रतिक्रिया आता है.

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