तुलसीपुर चुनाव हुआ दिलचस्प: मशहूद ख़ान को रोकने के लिए ज़ेबा का दाँव, पुराना इतिहास लेकिन…

तुलसीपुर विधानसभा का चुनाव इस बार दिलचस्प लग रहा है। यहाँ से भाजपा के मौजूदा विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, सपा के पूर्व विधायक अब्दुल मशहूद ख़ान, निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान में मुख्य मुक़ाबला माना जा रहा है। यहाँ बसपा से भुवन प्रताप सिंह और कांग्रेस से दीपेंद्र सिंह भी मैदान में हैं।

सीट के चुनावी इतिहास की बात हम कर चुके हैं। इस वीडियो में हम डिस्कस करेंगे उस प्रत्याशी की जो यहाँ लंबे समय से स्थापित है। हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के अब्दुल मशहूद ख़ान की। मशहूद ने अपना पहला चुनाव सन 1998 में तब लड़ा जब इस सीट के विधायक रिज़वान ज़हीर ख़ान सांसद चुन लिए गए। रिज़वान के सांसद चुने जाने के बाद सपा की ओर से अब्दुल मशहूद ख़ान ने उपचुनाव में पर्चा भरा। मशहूद को रिज़वान का समर्थन था लेकिन मशहूद को भाजपा के कमलेश कुमार सिंह ने 4009 वोटों से हरा दिया।

2002 में जब उत्तर प्रदेश में आम चुनाव हुए तो मशहूद को एक बार फिर सपा से टिकट मिला। इस बार भी उन्हें बलरामपुर के तत्कालीन सपा सांसद रिज़वान ज़हीर का समर्थन प्राप्त था। मशहूद ने ये चुनाव 2396 वोटों से जीता। इस चुनाव में मशहूद की चुनावी साख दाँव पर लगी थी, कुछ लोग ऐसा भी कह रहे थे कि अगर इस बार मशहूद न जीते तो उन्हें फिर टिकट नहीं मिल सकेगा। निर्दलीय कमलेश कुमार सिंह से क़रीबी मुक़ाबले में आख़िर मशहूद जीत गए।

2007 के विधानसभा चुनाव में मशहूद को सपा से फिर टिकट मिला। इस समय तक रिज़वान ज़हीर सपा छोड़कर बसपा में जा चुके थे। रिज़वान इस बात से नाराज़ थे कि मशहूद ने उनके साथ सपा क्यूँ नहीं छोड़ी।

मशहूद की चुनावी राजनीति ख़त्म करने के मक़सद से रिज़वान ज़हीर ने अपने भाई नोमान ज़हीर को बसपा से टिकट दिलवाया। भाजपा के कौशलेंद्र नाथ योगी ने मशहूद को 6499 वोटों से हरा दिया। कौशलेंद्र को 39250 वोट मिले जबकि मशहूद को 32751 वोट मिले। वहीं नोमान ज़हीर को भी 27716 वोट मिले।

2007 में भले मशहूद चुनाव हार गए हों लेकिन सपा में उनकी पकड़ अब बहुत मज़बूत हो चुकी थी। 2012 में सपा ने फिर मशहूद को प्रत्याशी बनाया। सपा लहर में मशहूद के सामने कोई प्रत्याशी टिक ही नहीं पाया। मशहूद ने रिज़वान ज़हीर के भाई सलमान ज़हीर को 33710 वोटों से करारी शिकस्त दी। मशहूद को 67205 वोट मिले जबकि दूसरे नम्बर पर रहे सलमान ज़हीर को 33395 वोट मिले, कांग्रेस के कमलेश कुमार सिंह को 31743 वोट मिले, भाजपा के हनुमन्त सिंह को 9884 वोट मिले।

2017 का विधानसभा चुनाव तुलसीपुर में अलग परिस्थिति का चुनाव था। जहाँ पूरे प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन था, यहाँ पर दोनों पार्टियों ने प्रत्याशी उतारा। मशहूद को उम्मीद थी कि सपा उन्हें टिकट देगी और सपा ने उन्हें टिकट दे भी दिया लेकिन अचानक कांग्रेस ने ज़ेबा रिज़वान को प्रत्याशी बनाया दिया। पूर्व सांसद रिज़वान ज़हीर की बेटी ज़ेबा ने अच्छा चुनाव अभियान चलाया।

मौजूदा विधायक होने की वजह से मशहूद से जनता की नाराज़गी भी थी। ज़ेबा और मशहूद के झगड़े में भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला ने बाज़ी मारी। इस चुनाव में मशहूद पहली बार तीसरे नम्बर पर चले गए लेकिन उन्हें 36549 वोट मिले। पूरे प्रदेश में सपा सरकार के ख़िलाफ़ हुए इस चुनाव में भी मशहूद ने अपना कोर वोट बचा लिया। 2022 विधानसभा चुनाव में सपा ने एक बार फिर मशहूद को प्रत्याशी बनाया है।

2002 के बाद से हर चुनाव में मशहूद को हराने के लिए रिज़वान ज़हीर परिवार का कोई न कोई सदस्य सामने रहा है। इस बार के चुनाव में मशहूद के सामने रिज़वान ज़हीर की बेटी ज़ेबा को जब किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय ही मैदान में उतर गईं। मशहूद का मुक़ाबला इस बार भाजपा से है लेकिन उनके लिए चुनौती ज़ेबा भी हैं। मशहूद लेकिन अपने चुनावी जीवन में इस तरह की चुनौती का सामना लगातार करते रहे हैं। इस बार नतीजे उनके पक्ष में होंगे या नहीं ये समय ही बताएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.