ये बड़ी दिलचस्प बात है कि जब 23 नवम्बर की सुबह ये ख़बर लोगों ने देखी/पढ़ी कि देवेन्द्र फडनवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की एक बार फिर शपथ ले ली है और उनके साथ एनसीपी के नेता अजीत पवार ने उप-मुख्यमंत्री की शपथ ले ली है, तब लगा कि शिवसेना और कांग्रेस के साथ धोका हो गया है. कुछ मीडिया हाउस ने शिवसेना के शीर्ष नेतृत्व को “पप्पू” तक कह डाला.

आजकल एक अजीब सी बात ये भी हुई है कि किसी पार्टी के नेता को अगर कमज़ोर साबित करना होता है तो उसे “पप्पू” कह देते हैं लेकिन 23 नवम्बर की सुबह तो पूरी शिवसेना को ही लोग “पप्पू” कहने लगे. कुछ घन्टे ही बीते थे और लगने लगा कि शिवसेना तो नहीं बल्कि कोई और “पप्पू” बन गया है. एक मीडिया पर्सन ने शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे को “पप्पू” कह दिया था तो भाजपा समर्थकों का एक समूह उन्हें वही साबित करने पर लग गया लेकिन बिना विचलित हुए आदित्य ठाकरे अपना काम करते रहे.

शरद पवार ने जिस तरह से पूरी कहानी को अपने पक्ष में किया उसके बाद तो ऐसा लगा जैसे वो भाजपा के सबसे बड़े नेताओं को भी “पप्पू” बनाने में लगे हैं. मामला अदालत में गया तो सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को एक रोज़ के लिए टाल दिया और उसके बाद फ़ैसले के लिए भी एक दिन बाद का समय दिया. भाजपा को लगा कि ये उनके लिए मौक़ा है कि वो बहुमत सिद्ध करने के लिए अपनी कोशिशें तेज़ कर दें परन्तु भाजपा की सोच से अलग शरद पवार, शिवसेना और कांग्रेस ने कहा कि उनके 162 विधायक एक साथ ग्रैंड हयात में आने जा रहे हैं.

ग्रैंड हयात के ग्रैंड शो ने भाजपा के क़द्दावर नेताओं को “पप्पू” साबित कर दिया. भाजपा के वरिष्ठ नेता अब इस पर कुछ भी बोलने से बचने लगे और जब सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत सिद्ध करने के लिए एक दिन का समय दिया और उसके साथ प्रो-टेम स्पीकर को सिर्फ़ वोटिंग कराने का अधिकार दिया तो मामला पूरी तरह से पलट गया. अब ये साफ़ है कि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री होंगे, ये भी साफ़ है कि राजनीति के इस खेल में “पप्पू” कौन साबित हुआ.

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