20 सितंबर को राज्यसभा में कृषि क्षेत्र को लेकर तीन बिल ध्वनि म’त से पास किए गए थे। इसको लेकर एक वीडियो मिला है, जिसमें बिलों के पास होने के दौरान नियमों का पालन ना करने के लिए सरकार पर सवाल ख’ड़े किए जा रहे हैं। दरअसल, नियमों के मुताबिक़ सभापति सदन की कार्य’वाही में सबकी सहमति से ‘सेन्स ऑफ द हाउस’ लेकर ही समय में बदला’व कर सकते हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि किसान बिल पर बातचीत के दौरान सभापति ने इसे नहीं माना था। इसके अलावा नियम 252 (4) के अनुसार, संसद किसी भी प्रस्ताव या बिल पर बं’टवारे की मांग कर सकते हैं, जिसे सभापति को मानना चाहिए, लेकिन बिल पास करते समय सभापति ने मां’ग को स्वीकार नहीं किया और ना ही इस बिल को सले’क्ट कमे’टी के पास भेजने के प्रस्ताव पर भी वो’टिंग नहीं कराई गई।

इस संबं’ध में DMK सांसद तिरुचि शिवा ने कहा, “हम डिवीजन-डिवीजन चिल्ला’ते रहे लेकिन स्पीकर ने हमारी तरफ देखा तक नहीं।” वहीं सीपीएम सांसद केके रागेश ने बोले, “मैंने अपने प्रस्ताव पर वो’टिंग की मां’ग रखी लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।” जहाँ एक ओर वि’पक्ष केंद्र सरकार पर सवाल ख’ड़े कर रही है तो दूसरी ओर सरकार ने इस सबका ज़िम्मेदार विपक्ष को ठहराया है और साथ ही विपक्ष पर आरो’प भी लगाएं हैं। सरकार ने विपक्षी पार्टियों पर उपसभापति के साथ बुरा व्यवहा’र करने का आरो’प लगाया है।
Rajya Sabha
यही नहीं बल्कि राज्यसभा में हुए इस हं’गामे के आरो’प में 8 सांसदों को सस्पें’ड भी कर दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि उपसभापति ने नियमों के तहत ही बिल पास किए। इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “उपसभापति जी के साथ विपक्षी दलों के सांसदों ने जो किया, उसकी जितनी भी भर्त्स’ना की जाए, कम है।” केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस बारे में टिप्प’णी की है। उन्होंने कहा, “आप सदन में माइक तो’ड़ेंगे, आप उसके ता’र खी’चेंगे, आप रूलबुक को फाड़ेंगे, आप रूलबुक को फेकेंगे, टेबल पर डांस करेंगे और सस्पें’शन पर बाहर नहीं जाएंगे।”

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