मोदी-शाह को जिन नेताओं पर था सबसे ज्यादा भरोसा, उन्होंने ही चुनाव में…

May 3, 2021 by No Comments

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में हैट्रिक लगाते हुए एक बार फिर से जीत हासिल की है। ममता बनर्जी की पार्टी ने सिर्फ जीत ही नहीं हासिल की बल्कि बहुमत भी हासिल कर ली है। एक बार फिर ममता बनर्जी की हुई जीत से भाजपा को बड़ा झटका लगा है।

दरअसल भारतीय जनता पार्टी बीते काफी समय से ममता बनर्जी के गढ़ में सत्ता हासिल करने के लिए बेताब हो रही थी। इसी वजह से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अपने महत्वपूर्ण काम छोड़कर पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार कर रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह ने ख़ास दावा किया था कि इस बार भाजपा पश्चिम बंगाल में बहुमत से जीत हासिल करेगी।

माना जा रहा है कि भाजपा ने जिस क्षेत्र समुदाय और नेताओं को लुभाने के लिए अपनी सबसे ज्यादा ताकत झोंकी थी वहीं पर उन्हें अपेक्षित सफलता हासिल नहीं हो पाई है। दरअसल चुनाव अभियान के दौरान मतुआ, राजवंशी आदि समुदाय को रिझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक ने अपनी एड़ी-चोटी एक की थी।

वहीँ पार्टी ने बाहर से आए नेताओं पर भी बहुत विश्वास किया था। मगर नतीजों में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पूर्व मिदनापुर के इलाके में भी भाजपा को बड़ी उम्मीदें थी। पूर्व मिदनापुर में 16 और पश्चिम मिदनापुर में 15 विधानसभा सीटें हैं। इनमें से 23 पर तृणमूल को जीत मिली। झाड़ग्राम में भाजपा मजबूत होने का दावा कर रही थी।

जबकि जिले की सभी चार सीटें तृणमूल की झोली में गईं। 2019 से तुलना करें तो हुगली, नदिया, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर पूर्व और पश्चिम बर्दवान जैसे कई जिलों में भाजपा से अनेक सीटें झटकने में तृणमूल कामयाब रही।आखिर ऐसा क्या हुआ कि मोदी और अमित शाह जैसे रणनीतिकार को भी ममता ने 80 से कम सीटों पर रोक दिया।

वह भी तब, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां 15, गृहमंत्री अमित शाह ने 62 और पार्टी के अन्य बड़े नेताओं ने 117 सभाएं की थीं।
नतीजे आने से पहले वरिष्ठ पत्रकार अनवर हुसैन ने आउटलुक के साथ बातचीत में कहा था, “पश्चिम बंगाल में लोगों के सोचने का तरीका अलग है। उन्होंने भाजपा को अभी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। इसलिए उसकी सीटें जरूर 80 के आसपास अटक गईं।”

यह भी माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी कलह का भी फायदा तृणमूल कांग्रेस को मिला है। दरअसल दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी को जब पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने लायक उम्मीदवार नहीं मिल रहे थे। तो तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के कई विधायकों को अपने पाले में ले लिया।

जिसके चलते उन्होंने अपने ही उन नेताओं को टिकट नहीं दिया। जो सालों से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे थे। इसी वजह से पार्टी के पुराने नेताओं ने भी कुछ खास मेहनत नहीं की।

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