मोहम्मद ﷺ की बहन हज़रत शैमा रज़ि• का वाकिया, जब तलवारे भी झुक गई…

September 1, 2022 by No Comments

हुजूर सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की कोई बहन नहीं थी लेकिन जब आप हजरत हलीमा सादिया के पास गए तो वहां हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम की रजाई बहन का जिक्र आता है जो आपको लोरिया सुनाती थी। जिनका नाम हजरत शैमा था जब ग़ज़वात का सिलसिला शुरू हुआ तो जिस कबीला में सैयदा शैमा की शादी हुई थी उस कबीला के साथ मुसलमानों का टकराव हो गया था। अल्लाह ताला ने मुसलमानों को फतह दी इस कबीले के चंद लोग सहाबा कराम रज़ि अल्लाहु अन्हुम के हाथों गिरफ्तार होकर कैद कर दिए गए थे।

यह लोग अपने कैदियों को छुड़ाने के लिए फिदिया जमा करने लगे और कबीला के सरदार एक एक घर से रकम जमा कर रहे थे चलते चलते यह सैयदा शैमा रज़ि अल्लाहु अन्हा के घर पहुंच गए । उनसे कहने लगे कि इतना हिस्सा आपका भी आता है सय्यदा शैमा ने कहा किस लिए सरदार और साथ वाले लोगों ने कहा जो लड़ाई हुई है उसमें हमारे आदमी गिरफ्तार हो चुके हैं उनको छुड़ाने के लिए।

बातें करते-करते किसी की जबान पर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का नाम भी आ गया तो सय्यदा शैमा सुनकर कहने लगी अच्छा उन्होंने तुम्हारे लोग पकड़े हैं। सय्यदा शैमा ने कहा कि तुम रकम इकट्ठा करना छोड़ दो मुझे साथ ले चलो । सरदार ने सवालिया अंदाज़ में कहा कि आप को साथ ले चलें? हज़रत शैमा कहने लगी हां तुम नहीं जानते वह मेरे भाई लगते हैं। कौम के सरदारों के साथ हज़रत शैमा हुजूर सल्लल्लाहो वसल्लम के खेमो की तरफ जा रही थी और वहां सहाबा किराम पहरा दे रहे थे।

हजरत शैमा कौम के सरदारों के साथ जब आगे बढ़ने लगी तो वहां सहाबा जो तलवार उठाए पहरा दे रहे थे आवाज दी और कहा यह औरत रुक जा देखती नहीं कि आगे कूचा-रसूल है बगैर इजाजत के हज़रत जिब्रील नहीं जा सकते तुम कौन हो। हजरत शैमा ने जो जवाब दिया उसका अल्फ़ाज़ कुछ इस तरह है मेरा रास्ता छोड़ दो तुम जानते नहीं मैं तुम्हारे नबी की बहन लगती हूं । तलवारे झुक गई और उनका रास्ता छोड़ दिया गया।

हजरत शैमा हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के खेमा में दाखिल हो गई हुजूर सल्लल्लाहू सल्लम ने देखा और पहचान गए फौरन उठ कर खड़े हुए और फरमाया बहन कैसे आना हुआ। हज़रत शैमा ने बताया कि हमारे क़बीले के कुछ बंदे बंदी बनाए गए हैं उनको छुड़ाने आई हूँ आप सल्लल्लाहो सल्लम ने फ़रमाया बहन तुमने क्यों तकलीफ उठाई पैगाम भेज देती मैं छोड़ देता लेकिन तुम आ गई अच्छा हुआ मुलाकात हो गई।

फिर हुजूर सल्लल्लाहो वसल्लम ने कैदियों को छोड़ने का ऐलान किया कुछ घोड़े और चंद जोड़े हज़रत शैमा को तोहफे में दिए क्योंकि भाइयों के दरवाजे पर जब बहने आती हैं तो भाई खाली हाथ तो बहनों को छोड़ा नहीं करते उनको रुखसत करने के लिए आप खेमा से बाहर तशरीफ ले आए सहाबा की जमात मुंतज़िर थी फरमाया ए सहाबा आप जानते हैं जब भी मैं कैदी छोड़ा करता हूं मेरी यह आदत है कि आप लोगों से मशवरा करता हूं।

लेकिन आज ऐसा मौका आया कि मैंने आपसे मैं मशवरा नहीं किया और कैदी भी छोड़ दिए सहाबा केराम ने जवाब दिया या रसूल अल्लाह आप जो चाहे करें तो अल्लाह के रसूल ने फरमाया मेरे दरवाजे पर मेरी बहन आई थी। सुब्हान-अल्लाह यह होती है बहन की इज्जत, ये होता है बहन का वकार, आप भी हद करें आप अपनी बहनों और बहनों के बच्चों से खूब प्यार करेंगे।

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