उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद ऐसी ख़बरें आयीं कि सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह से मुलाक़ात हुई है. हालाँकि इस बात का खंडन ख़ुद राजभर ने कर दिया लेकिन इस तरह की उम्मीदें लग रही थीं कि राजभर भाजपा के गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा से 6 विधायक चुने गए हैं. इनमें एक विधायक अब्बास अंसारी भी हैं. अब्बास अंसारी बाहुबली नेता और पूर्वांचल की कई सीटों पर अपना प्रभाव रखने वाले मुख्तार अंसारी के बेटे हैं. अंसारी परिवार के सुभासपा से जुड़ जाने के बाद सपा-सुभासपा गठबंधन मज़बूत हुआ. ख़बर है कि राजभर ने इस बात पर विचार किया था कि क्या गठबंधन की हार के बाद भाजपा से हाथ मिला लिया जाए.

हालाँकि राजभर ने इस विचार को जल्द ही त्याग दिया. इसका कारण अंसारी परिवार की मर्ज़ी का न होना था. मुख्तार अंसारी और उनके बेटे अब्बास अंसारी ऐसी पार्टी के साथ रहना नहीं पसंद करते जिसका गठबंधन भाजपा से हो. सुभासपा ने इस बात को समझा और भाजपा से गठबंधन करने का ख़याल त्याग दिया.

इतना ही नहीं सुभासपा को लोकसभा में भी बड़ी उम्मीदें हैं, इन उम्मीदों का कारण मुख्तार अंसारी का साथ आना ही है. राजभर को लगता है कि ग़ाज़ीपुर से सांसद अफ़ज़ाल अंसारी और घोसी से मुख्तार अंसारी को अगर सुभासपा टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए तो लोकसभा में अच्छी ताल ठोंकी जा सकती है. अफ़ज़ाल अभी बसपा में हैं और ग़ाज़ीपुर से सांसद हैं.

माना जा रहा है कि बसपा के इस तरह से कमज़ोर हो जाने के बाद मुख्तार के बड़े भाई अफ़ज़ाल भी सुभासपा में आ जाएँगे. सुभासपा की पॉपुलैरिटी भी उसी क्षेत्र में है जिस क्षेत्र में अंसारी बंधू पोपुलर हैं. ऐसे में राजभर इस प्रकार की ग़लती करने से बचेंगे ही. दूसरी ओर अखिलेश यादव ने जब से लोकसभा से इस्तीफ़ा देकर लखनऊ में सक्रिय रहने की बात कही है, तब से ही सपा के गठबंधन साथियों में हौसला देखा जा रहा है.