मुख्तार अंसारी ने विधायक की सीट छोड़ी लेकिन अब बड़ी तैयारी, अफ़ज़ाल भी राजभर की..

उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां पर हमेशा ही राजनीतिक गतिविधियाँ चलती रहती हैं. हर एक चुनाव को बहुत ख़ास तरह से देखा जाता है और जब बात विधानसभा चुनाव की हो तो माहौल अलग ही दिखता है. परन्तु विधानसभा चुनाव से भी बढ़कर माहौल बनता है लोकसभा चुनाव में. लोकसभा चुनाव में जनता देश के लिए सरकार चुनती है. जो पार्टी लोकसभा चुनाव में बहुमत पाती है वो केंद्र में सरकार बनाती है.

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव की एहमीयत इसलिए भी ज़्यादा है क्यूँकि यहाँ पर लोकसभा की 80 सीटें हैं और जो पार्टी यहाँ ज़्यादा सीटें जीतती है वो केंद्र में सरकार बनाने में बड़ा रोल अदा करती है. यही वजह है कि विधानसभा चुनाव के ख़त्म होते ही भाजपा, सपा और बसपा जैसे दलों ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है.

ख़बर है कि लोकसभा चुनाव के लिए कौन कहाँ से प्रत्याशी होगा इस पर भी पार्टियाँ विचार करने लगी हैं. हाल ही में ख़बर आई थी कि AIMIM के मुबारकपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी गुड्डू जमाली ने बसपा का दामन थाम लिया है. ऐसा मुमकिन है कि बसपा गुड्डू जमाली को आज़मगढ़ में होने वाले लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए लेकिन बड़े स्तर पर तैयारी 2024 लोकसभा चुनाव की ही है.

ख़बर है कि सुभासपा भी लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशियों के नाम तैयार कर रही है. सुभासपा सूत्रों की मानें तो वो मुख्तार अंसारी को लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाना चाहती है. मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी ने 2022 विधानसभा चुनाव में मऊ से जीत हासिल की है. वहीं मुख्तार के बड़े भाई अफ़ज़ाल अंसारी बसपा से सांसद हैं.

सुभासपा की कोशिश है कि अफ़ज़ाल अंसारी भी उनके साथ आ जाएँ और मुख्तार भी लोकसभा चुनाव लड़ें. अफ़ज़ाल अंसारी ने 2019 लोकसभा चुनाव में ग़ाज़ीपुर सीट से चुनाव जीता था. उन्होंने भाजपा के क़द्दावर नेता मनोज सिन्हा को एक लाख से भी अधिक वोटों से हराया था. अफ़ज़ाल अंसारी फ़िलहाल बसपा में हैं लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि वो लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी बदल सकते हैं.

2022 विधानसभा चुनाव में बसपा की बड़ी हार हो जाने की वजह से ऐसा संभव है कि अफ़ज़ाल सपा या सुभासपा की ओर जाएँ. सुभासपा अभी से अफ़ज़ाल से संपर्क बना रही है क्यूँकि अफ़ज़ाल के भतीजे अब्बास अंसारी सुभासपा के विधायक हैं. वहीं ओम प्रकाश राजभर से अंसारी परिवार के रिश्ते भी काफी अच्छे हैं.

सुभासपा चाहती है कि मुख्तार अंसारी ख़ुद घोसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ें. 2014 में मुख्तार घोसी से चुनाव लड़ चुके हैं जबकि 2009 में वो वाराणसी से चुनाव लड़े थे. मुख्तार ने 2009 में भाजपा के बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी को कड़ी टक्कर दी थी लेकिन क़रीबी अंतर से चुनाव हार गए थे. वाराणसी लोकसभा सीट से भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव में प्रत्याशी बनाती है, इसलिए मुख्तार अंसारी भी घोसी से ही चुनाव लड़ना चाहेंगे. सुभासपा की कोशिश है कि मुख्तार घोसी और अफ़ज़ाल भी उनकी पार्टी में आकर ग़ाज़ीपुर से चुनाव लड़ें.

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