पिछले कुछ समय से ऐसी ख़बरें आम हैं जहाँ पर भाजपा समर्थक मु’स्लिम स’मुदाय के बारे में कुछ ग़लत टिपण्णी करते नज़र आ जाते हैं. मध्य प्रदेश में तो मंत्रियों ने ऐसे बयान दिए हैं जिसके बाद ऐसा लगता है कि उनका मक़सद शान्ति स्थापित करने के बजाय अशांति की जय करना है. साम्प्र’दायिक राजनीति करके वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश करने वाले अक्सर ये भूल जाया करते हैं कि इस तरह की राजनीति बहुत दिन नहीं चलती है.

देश संविधान और मिलजुल कर चलता है. पिछले कुछ सालों में एक ऐसा वर्ग भी तैयार हुआ है जो अरब देशों को बिल्कुल पसंद नहीं करता. हालाँकि इनका विशेष कोई बस चलता नहीं है, भारत की दोस्ती अरब देशों से लगातार मज़बूत होती जा रही है. ख़बर है कि भारत ने अरब के बड़े देश मिस्र से गेंहू को लेकर समझौता किया है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन और रूस से गेहूं का सर्वाधिक आयात करने वाले देश मिस्र ने भारत को गेहूं आपूर्तिकर्ता के तौर पर मंजूरी दी है. बता दें, रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में गेहूं की उपलब्धता में तेजी से गिरावट आई है. ये दोनों ही देश गेहूं के प्रमुख उत्पादक और निर्यातक हैं.

गोयल ने ट्वीट किया, ‘‘भारतीय किसान दुनिया का पेट भर रहे हैं. मिस्र ने भारत को गेहूं आपूर्तिकर्ता के तौर पर मंजूरी दी है. दुनिया सतत खाद्य आपूर्ति के भरोसेमंद वैकल्पिक स्रोत की खोज में है ऐसे में मोदी सरकार आगे आई है. हमारे किसानों ने भंडारों को भरा रखा और हम दुनिया की सेवा करने के लिए तैयार हैं.’’

अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 के बीच भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर 1.74 अरब डॉलर का हो गया. पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 34.017 करोड़ डॉलर था. 2019-20 में गेहूं निर्यात 6.184 करोड़ डॉलर का था जो 2020-21 में बढ़कर 54.967 करोड़ डॉलर हो गया था. भारत गेहूं का निर्यात मुख्य रूप से पड़ोसी देशों को करता है जिनमें सर्वाधिक 54 फीसदी निर्यात बांग्लादेश को किया जाता है.

भारत ने यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनेशिया जैसे देशों के नए गेहूं बाजार में भी प्रवेश किया है. 2020-21 में भारत से गेहूं का आयात करने वाले शीर्ष दस देशों में बांग्लादेश, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, यमन, अफगानिस्तान, कतर, इंडोनेशिया, ओमान और मलेशिया हैं. दुनिया के कुल गेहूं निर्यात में भारत की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है. हालांकि उसकी हिस्सेदारी 2016 में 0.14 प्रतिशत से 2020 में बढ़कर 0.54 प्रतिशत हो गयी थी.

भारत गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया में 2020 में गेहूं के कुल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 14.14 फीसदी थी. भारत सालाना करीब 10.759 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन करता है और ज्यादातर खपत घरेलू स्तर पर ही हो जाती है.