मुसलमानों से नफरत में मस्जिद में गया ब’म ब्ला’स्ट करने, फिर हुआ कुछ ऐसा कि खुद ही कबूल लिया इस्लाम

September 15, 2022 by No Comments

किसी के मन में सालों से पल रही नफ’रत को प्यार में बदलने के लिए शायद एक पल का समय भी काफी होता है ऐसा ही कुछ एक अमेरिकी शख्स के साथ भी हुआ, जिस को कभी इस्लाम के नाम से इतनी चिढ़ थी कि मस्जिद में ब’म ब्ला’स्ट कर सैंकड़ों लोगों को मौ’त की नींद सुला देना चाहता था लेकिन अचा’नक ऐसा हुआ कि वो मुसलमानों को लेकर उसने अपना मन बदल दिया बल्कि इस्लाम कबूल कर मुसलमान बन गया।

ये कहानी है अमरीका के रिचर्ड मैकिनी की जिन पर हाल ही में बनी डॉक्युमेंट्री चर्चा में है रिचर्ड ने 25 साल यूएस मरीन फोर्स में अपनी सेवाएं दी हैं नौकरी के दौरान मैकिनी का कई खाड़ी देशों में भी जाना हुआ, जहां मैकिनी हमेशा मुस्लिम लोगों को घा’तक दुश्म’नों के नजरिए से देखते थे  वो मुसलमानों से इतनी नफरत करते थे वो अमेरिका इंडियाना में अपने घर वापस लौटते तो भी उनकी नफ’रत खत्म नहीं होती थी।

मैकिनी की मुसलमानो से इतनी नफ’रत बढ़ गई थी अगर लोकल स्टोर में कोई हिजाब पहने महिला मौजूद होती थी, तो मैकिनी की पत्नी उनका रास्ता बदलवा देती थी बाद में तो मैकिनी की नफ’रत का आलम ऐसा हो गया था कि पत्नी ने भी उनका साथ छोड़ दिया था वो कहते हैं इंडियाना के मुन्सी शहर में रहते हुए जब भी वे घर से बाहर जाते थे तो उन्हें मजबूरन मुस्लिम लोगों को देखना पड़ता था।

नफ’रत की आ’ग में ज’ल रहे मैकिनी ने मस्जिद ( इस्लामिक सेंटर) में ब्ला’स्ट करने का मन बनाया मैकिनी ने साल 2009 में शुक्रवार के दिन धमा’का करने का मन बनाया क्योंकि उस दिन काफी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर जमा होते थे जब मैकिनी मस्जिद के गेट से गुजर रहे थे तो अंदर बैठे कुछ लोगों ने उन्हें बुलाया और मुलाकात की उस समय तक भी मैकिनी को लग रहा था कि ये सभी लोग ह’त्यारे हैं।

मैकिनी को अंदर बुलाने वाले लोगों में अफगान रिफ्यूजी डॉक्टर साबिर बहरमी, उनकी पत्नी बीबी बहरमी और एक स्थानीय जोमो विलियम्स शामिल थे मैकिनी ने जैसा सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ उन लोगों ने मैकिनी के साथ खास मेहमान की तरह पेश आए कुछ समय में ही मैकिनी को महसूस हो गया कि ये लोग वैसे नहीं हैं, जैसी उनके मन में सोच पैदा हो गई थी।

मैकिनी इस बारे में कहते हैं कि ये सभी लोग काफी सादे और खुश मिजाज थे वे सभी अपनी जिंदगी से खुश थे वो लोग मैकिनी के साथ बात करना काफी पसंद कर रहे थे इस अनुभव ने मैकिनी की सोच बदली और इसके बाद वे अक्सर मस्जिद जाने लगे करीब आठ सप्ताह बाद उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया जिसके बाद वे मुन्सी में इस्लामिक सेंटर के दो साल अध्यक्ष भी रहे।

मैकिनी के जीवन पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म ‘Stranger at the Gate’ भी बनाई जा चुकी है, जिसका डायरेक्शन जोशुआ सेफतेल ने किया है  बीते जून महीने में शॉर्ट फिल्म ने ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल ज्यूरी मेंशन भी जीता था अब 14 सितंबर से इस फिल्म को फ्री में यूट्यूब पर भी देखा जा सकता है।

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