उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने आज अपने विधायकों की मीटिंग की और विधायक दल के नेता का चुनाव किया. पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को विधानमंडल दल और विधायक दल का नेता चुना गया. अखिलेश को विधायक दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव अवधेश प्रसाद ने रखा और विधानमंडल दल का नेता चुने जाने के लिए प्रस्ताव लालजी वर्मा ने रखा.

अखिलेश यादव को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया. अखिलेश यादव के सदन में नेता प्रतिपक्ष होने से सपा में एकजुटता रहने की उम्मीद है. साथ ही सपा के सहयोगी दल भी सपा के इस फ़ैसले से ख़ुश हैं. इसके पहले ऐसी भी चर्चाएँ थीं कि शिवपाल यादव को सपा नेता प्रतिपक्ष बना सकती है. हालाँकि शिवपाल यादव प्रसपा के अध्यक्ष हैं और अभी तक पार्टी का विलय सपा में नहीं हुआ है.

सपा नेताओं का कहना है कि शिवपाल यादव ने चुनाव भले सायकिल चुनाव चिन्ह पर लड़ा हो लेकिन उनकी पार्टी है और वो उस पार्टी के अध्यक्ष हैं. सपा के सूत्र बताते हैं कि शिवपाल की पार्टी को मनचाहा चुनाव चिन्ह नहीं मिला, इसीलिए उन्हें सायकिल चुनाव चिन्ह पर सपा ने खड़ा किया. दूसरी ओर शिवपाल यादव को उम्मीद थी कि उन्हें आज की मीटिंग में बुलाया जाएगा.

बुलावा न मिलने पर शिवपाल ने नाराज़गी भी जताई और कहा कि इस मीटिंग की वजह से मैंने अपने प्रोग्राम को भी टाला हुआ था लेकिन सपा की ओर से मुझे न्योता नहीं मिला. इस सवाल को जब अखिलेश यादव के समक्ष मीडिया ने रखा तो उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों की बैठक 28 मार्च को है, इसमें सभी सहयोगी दलों के विधायकों को बुलाया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि शिवपाल यादव जसवंतनगर सीट से विधायक हैं. शिवपाल एक समय समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में शुमार किए जाते थे. शिवपाल समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष भी थे लेकिन अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव से विवाद हो जाने के चलते उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. इसके बाद उन्होंने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया.

आपको बता दें कि शिवपाल और अखिलेश के बीच विवाद 2017 विधानसभा चुनाव के पहले हुआ था लेकिन तब भी शिवपाल सपा के ही निशान पर चुनाव लड़े थे और जीते थे. इस विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल यादव ने अखिलेश से अपने मतभेद भुलाकर उनको समर्थन देने का एलान किया था. इसके बाद शिवपाल यादव को सपा ने जसवंतनगर से अपनी ही पार्टी के चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी बनाया.