समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने तीन उम्मीदवारों का चयन कर लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबको चौंकाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को राज्यसभा की उम्मीदवारी के लिए समर्थन दिया। सिब्बल ने कुछ दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफ़ा दिया है। वो निर्दलीय प्रत्याशी के बतौर मैदान में हैं, सपा ने उन्हें समर्थन दिया है।

सिब्बल के नामांकन के दौरान अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। कपिल सिब्बल पिछले कुछ समय से कांग्रेस के अंदर बाग़ी सुर लिए हुए थे। सिब्बल ने आज़म ख़ान की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की, माना जाता है सिब्बल की पैरवी का ही नतीजा है कि आज़म की ज़मानत मंज़ूर हुई। दूसरी ओर जब आज़म ख़ान से ये पूछा गया कि सपा की ओर से सिब्बल को राज्यसभा भेजा जा रहा है तो आज़म ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी होगी।

अखिलेश यादव के इस दाँव से आज़म और अखिलेश के रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है वहीं शिवपाल यादव अब फिर से अकेले पड़ते दिख रहे हैं। सिब्बल ने अपनी उम्मीदवारी पर अखिलेश यादव के साथ आज़म ख़ान का शुक्रिया अदा किया। सपा ने दूसरा उम्मीदवार जावेद अली ख़ाँ को बनाया है। जावेद 2014 से 2020 तक राज्यसभा सदस्य रहे थे लेकिन 2020 में सपा के विधायकों की संख्या कम थी, इसलिए राज्यसभा सीट सपा के खाते में एक तरह से बहुत कम रह गईं।

अब सपा के सदस्यों की सँख्या बढ़कर 111 हो गई है और सपा गठबंधन के पास 125 सीटें हैं, ऐसे में इस राज्यसभा चुनाव में सपा को 3 उम्मीदवार भेजने का मौक़ा है। ऐसे में पार्टी ने जावेद अली ख़ान को मौक़ा दिया है। जावेद को प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का क़रीबी माना जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सिब्बल को राज्यसभा भेजने की बात पर राम गोपाल राज़ी नहीं थे। अखिलेश ने राम गोपाल को मनाने के लिए उनके क़रीबी जावेद अली को प्रत्याशी बनाया है। अखिलेश ने तीसरा प्रत्याशी अपनी पत्नी और समाजवादी पार्टी की नेत्री डिम्पल यादव को बनाया है। डिम्पल राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। अखिलेश के लोकसभा से इस्तीफ़ा देने के बाद दिल्ली में अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए अखिलेश डिम्पल को राज्यसभा भेज रहे हैं। इन तीनों सीटों पर सपा की जीत निश्चित है।

आपको बता दें कि 4 जुलाई को राज्यसभा की 70 सीटों के लिए मतदान होना है, इसमें से 11 सीटें उत्तर प्रदेश से हैं। राज्यसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार राज्य के विधायक को होता है। ऐसे में जिस पार्टी के विधायक राज्य में अधिक हैं, उसके अधिक उम्मीदवार राज्यसभा पहुँचते हैं। इसी कैलकुलेशन की वजह से उत्तर प्रदेश की 11 में से 3 सीटों पर सपा की जीत निश्चित है, जबकि भाजपा का सात सीटों पर जीतना निश्चित है।

एक सीट पर सपा और भाजपा के बीच टक्कर हो सकती है। जिन 11 सीटों के लिए UP में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं उनमें से 5 भाजपा, 2 बसपा, एक कांग्रेस और 3 सपा के पास थीं। बसपा और कांग्रेस के विधायकों की सँख्या बहुत कम होने की वजह से इनको इस चुनाव में कोई सीट नहीं मिलेगी।