नीतीश के बयान पर तेजस्वी का पलटवार,”नीतीश कुमार के बयान का कोई मतलब नहीं…”

मार्च महीने में पाँच राज्यों के नतीजे आए और चार में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की वहीं पंजाब में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा. हालाँकि हाल ही में बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. इस हार के बाद से जहाँ पश्चिम बंगाल में भाजपा के अन्दर फूट पड़ने की ख़बर है वहीं बिहार में भी भाजपा के लिए मुश्किलें दिख रही हैं.

पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए बड़ा ख़तरा सीपीआई-एम से है. एक समय राज्य की सत्ता पर क़ाबिज़ रहने वाली वामपंथी पार्टी वापसी करने के लिए दमख़म लगा रही है वहीं भाजपा के नेता अपनी ही पार्टी से नाख़ुश हैं. दूसरी ओर बिहार में भी भाजपा के लिए राज्य की राजनीति को समझना मुश्किल दिख रहा है. इसी सब के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने CAA लागू करने को लेकर बयान दे दिया.

अमित शाह ने कहा कि कोरोना महामारी के ख़त्म होते ही देश में CAA लागू किया जाएगा. इस पर नीतीश कुमार ने बयान दिया और कहा कि ये पॉलिसी से जुड़ा मसला है. राज्य सरकार फिलहाल कोरोना से लोगों को सुरक्षित करने में लगी हुई है. सरकार की प्राथमिकता फिलहाल वही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के CAA को लेकर दिए बयान पर भी तेजस्वी ने पलटवार किया.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान का कोई अर्थ नहीं है. उनकी पार्टी ने संसद में बिल का समर्थन किया था. ऐसे में अब वो क्या बोलते हैं, उससे क्या फ़र्क़ पड़ता है. तेजस्वी ने कहा,”CAA-NRC को लेकर हमार स्टैंड शुरुआत से ही स्पष्ट रहा है. हमने संसद में भी इसका विरोध किया है. मुझे नहीं लगता कि आने वाले समय में ये बिहार में लागू होने वाला है. विपक्ष की सभी पार्टियों के नेता एकजुट होकर इस मुद्दे के खिलाफ सड़क पर उतरे थे. जेडीयू ने तो कानून का संसद में समर्थन किया है. ऐसे में जब समर्थन में मत दिया है तो बयान का क्या मतलब है.”

उल्लेखनीय है कि CAA का विरोध कई बड़े विपक्षी दल कर रहे हैं जिसमें कांग्रेस और राजद भी शामिल हैं. इन दलों का मानना है कि CAA धर्म-विशेष को टारगेट करने के लिए लाया गया एक क़ानून है जो NRC के साथ जुड़ते ही ख़तरनाक हो जाएगा. CAA के अंतर्गत पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समुदाय के लिए नागरिकता लेना आसान किया गया है. हालाँकि इसमें उन देशों को शामिल नहीं किया गया जहाँ मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक है.

इसमें नेपाल, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों को शामिल नहीं किया गया है जबकि पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश देशों को शामिल किया गया है. CAA की एक आलोचना ये भी है कि इसमें 6 ही धर्मों के अल्पसंख्यकों को शामिल किया गया है. इसके तहत हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को शामिल किया गया है जबकि यहूदी और अन्य छोटे धार्मिक समूहों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

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