हम बात करेंगे बेहट विधानसभा की. सहारनपुर ज़िले में पड़ने वाली ये विधानसभा 2008 में वजूद में आयी. इसके पहले ये क्षेत्र मुज़फ्फराबाद विधानसभा में आता था, परिसीमन के बाद मुज़फ्फराबाद विधानसभा ख़त्म कर दी गई और बेहट विधानसभा वजूद में आई.

सहारनपुर ज़िला उत्तर प्रदेश के सबसे उत्तरी हिस्से में पड़ता है और ये हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से सटा हुआ है. ये दोआब क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में पड़ने वाली शिवालिक रेंज के पास है. इस क्षेत्र का प्रमुख व्यवसाय किसानी माना जाता है.

सहारनपुर ज़िले की सात विधानसभा सीटों में से एक बेहट को मुस्लिम बहुल सीट माना जाता है. 2008 के परिसीमन के बाद जब 2012 में विधानसभा चुनाव हुए तो बेहट से बसपा के महावीर सिंह राणा ने जीत दर्ज की. कांग्रेस के नरेश सैनी दूसरे स्थान पर रहे जबकि सपा के उमर अली ख़ान 47 हज़ार से अधिक वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे. विजेता महावीर सिंह को 70,274 और नरेश सैनी को 69,760 वोट मिले थे.

2017 के विधानसभा चुनाव में यूँ तो पूरे प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर थी लेकिन कांग्रेस ने यहाँ से बाज़ी मार ली. इस क्षेत्र को इमरान मसूद का गढ़ कहा जाता है. इमरान मसूद की पॉपुलैरिटी का फ़ायदा कांग्रेस को मिला और कांग्रेस प्रत्याशी नरेश सैनी को ज़बरदस्त जीत मिली. भाजपा के महावीर सिंह राणा दूसरे पर रहे तो बसपा के मुहम्मद इक़बाल क़रीबी मुक़ाबले में तीसरे पर रहे. ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े थे.

2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी नरेश सैनी अब भाजपा में आ चुके हैं. इस बार वो भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं जबकि सपा ने उमर अली मलिक को टिकट दिया है. बसपा ने रहीश मलिक को मैदान में उतारा है. चुनाव के ठीक पहले इमरान मसूद सपा में आ गए थे और बेहट से टिकट माँग रहे थे.

वहीं इमरान मसूद के सपा में आने की ख़बरों के बाद ही नरेश सैनी भाजपा में चले गए थे. हालाँकि अंतिम समय में सपा ने इमरान मसूद को मना लिया और यहाँ से उमर अली मलिक को सपा ने बतौर प्रत्याशी मैदान में उतारा है. बेहट सीट पर मतदाताओं का क्या रुख़ रहता है ये तो चुनाव के नतीजों के बाद ही पता चलेगा. यहाँ वोट 14 फ़रवरी को डाले जाएँगे.