भारत में कोरो’ना वाय’रस संक्रम’ण तेज़ी से फैल रहा है। रोज़ कोरो’ना के नए मामले बड़ी तादाद में आ रहे हैं और भारत में अब तकरीबन कोरो’ना संक्रमण के म’रीज़ों की तादाद 3 लाख 90 हज़ार से ज़्यादा पहुंच गई है और तकरीबन 12 हज़ार से ज़्यादा लोग इससे अपनी जान गवां चुके हैं। राहत की बात ये है कि अभी तक तक़रीबन 2 लाख से ज़्यादा लोग इस वाय’रस से ठीक हो कर इसको मा’त देने में कामियाब भी रहे हैं। इसी के चलते देश में कोरो’ना के बढ़ते मामलों को मद्देनजर रखते हुए रेलवे कोचों को आपातकालीन स्थिति में आइसोलेशन बेड के रूप में इस्‍तेमाल किया जाएगा। बताया जा रहा है कि ये निर्णय लेने से पहले की रेलवे के एसी vs नॉन एसी कोचों (AC vs NAC coaches) को कोविड-19 के म’रीजों (Covid Patients) के बेड में तब्दील किया जाए या नीति आयोग और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ चर्चा की गई थी।

इस बात को भी मद्देनजर रखा गया कि एसी नलिका (AC ducting) के जरिये कोविड-19 वाय’रस के संभावित संचरण के जोखिम के मद्देनजर एसी कोच उपयुक्त नहीं होंगे और जैसा कि बताया गया है कि जब तापमान ज़्यादा होता है तो वाय’रस को ह’राने में मदद मिलने की आशंकाएं जताई जाती है। इसी के साथ लहुली खिड़कियों से आने वाली हवा और हवा का सर्कुलेशन म’रीज़ों के लिए भी मददगार बताया गया। एम्पावर्ड ग्रुप ने यह तय किया था कि वातानुकूलित यानी AC कोचों की अनुपयुक्‍तता (unsuitability) और ट्रांसमिशन जोखिम के कारण ही ये फैसला लिया गया कि नॉन एसी कोचों (Non Air Conditioned coaches) को कोविड केयर सेंटर में तब्दील किया जाए। और यह बात भी बताई गई के कोरो’ना संक्र’मित म’रीज़ों के लिए ज़्यादा तापमान और हवादार जगह (well ventilated area) रिकवरी के लिहाज से अहम होगा।

सूत्रों से ये बताया जा रहा है कि कवर शीट्स (White Canat) या दूसरे उपयुक्त चीज़ों को प्लेटफार्मों पर मौजूद आइसोलेशन कोचों के ऊपर बिछाया जा रहा है। इसको बिछाने के पीछे वजह ये है कि बाहर के तापमान को अंदर कोचों में कम करने में मदद मिले। बता दें कि उन सभी कोचों पर बबल रैप की फिल्में लगाई जा रही हैं इनको लगाने की वजह ये है कि इनसे हो सकता है कि कोच के अंदर के तापमान में 1° सेल्सियस की कमी आसके और सभी आइसोलेशन के लिए तैयार किये जाने वाले आइसोलेशन डिब्बों की छत को हीट रिफ्लेक्टिव पेंट के साथ पेंट करके ट्रायल किया गया था और ये कार्य नॉर्दर्न रेलवे द्वारा किया जा रहा है। जब इसको टेस्ट किया गया तो नतीजे में पाया गया कि डिब्बों के अंदर का तापमान 2.2 ℃ तक कम किया जा सकता है।

सूत्रों से ये भी बताया जा रहा है की IIT, मुंबई के सहयोग से विकसित एक अन्य कोटिंग के लिए भी ट्रायल की योजना बनाई जा रही है। यह ट्रायल 20 को किया जाएगा और औरपरिणाम पर नजर रखी जाएगी। साथ ही रेलवे कोचों की छत को पेंट करने के लिए भी तैयारी भी की जा रही है और तो और इसके अलावा तापमान को कम करने के लिए भी बांस के ठाठ जैसी वैकल्पिक व्‍यवस्‍था पर भी चर्चा हो रही है। रेलवे कोचों के अंदर पोर्टेबल कूलर लगा कर भी देखा गया है और बताया जा रहा है कि ये कूलर लगा कर तापमान को तीन डिग्री तक काम किया जा सकता है। वाटर मिस्ट सिस्टम (पानी की फुहार) जैसे उपायोग को भी आजमाया जा रहा है। शुष्क हवा के मौजूदा मौसम में यह उम्मीद की जाती है कि इसके कारण तापमान में कमी आएगी।

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