राजस्थान के कोटा में नवजात बच्चों की मौत का सिलसि’ला इस तरह चला कि जहाँ उससे संवेद’नशील लोगों के दिल द’हल गए वहीं सरकारी ज़िम्मेदारी से बचने के लिए राजनीतिक ग़ै’र ज़िम्मे’दाराना ब’यान आने लगे। इन ब’यानों को जानने से पहले आपको बताते हैं वो आँक’डें जिसे जानकर आप भी द’हल जाएँगे, ये आँ’कडें हैं राजस्थान में नवजात शिशुओं की मृ’त्यु द’र के। आपको जानकर है’रानी होगी कि न सिर्फ़ कोटा बल्कि राजस्थान के अन्य क्षेत्रों जैसे बाड़मेर, बूंदी यहाँ तक की जोधपुर से भी ऐसे आँक’डें आए हैं जो परे’शान करने वाले हैं।

बूंदी के एक अस्पताल से दिसंबर में 10 बच्चों की मौ’त की ख’बर आई है। वहीं बाड़मेर के सरकारी अस्पताल में 2019 में जिन 2966 बच्चों को दा’खिल करवाया गया उनमें से 202 की मौ’त हो गयी। बात जोधपुर की हो तो यहाँ 2019 में कुल 754 बच्चों की मौ’त हुई जिसमें अकेले दिसंबर महीने का आँकड़ा 146 है। दिसंबर 2019 में ये आंकड़ों 146 है जबकि साल 2019 में NICU, PICU में कुल 754 बच्चों की मौ’त हुई।

सचिन पायलट

कोटा माम’ले में जब सरकारी तंत्र पर सवा’ल उठे तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करके कहा कि “कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौ’त के बारे में सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस साल 963 बच्चों की मौ’त हुई है, जबकि साल 2015 में 1260 बच्चों ने जा’न गं’वाई थी। जबकि 2016 में यह आंकड़ा 1193 था। जब राज्य में बीजेपी का शासन था. वहीं, 2018 में 1005 बच्चों की जा’न गई है।

अशोक गहलोत के इस ग़ै’र- ज़िम्मे’दाराना बयान पर लोगों की टिप्पणी आयी यही नहीं उनकी ही सरकार से उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सवा’ल उठाए हैं। इस माम’ले में सचिन पायलट का कहना है कि “मुझे लगता है कि हमें इस मु’द्दे और ज्यादा संवे’दनशील होने की जरूरत है। सचिन पायलट ने कहा कि हमें अब जवाबदेही सरकार को लेनी चाहिए। ये कहते हुए सचिन पायलट ने कहा कि “स’त्ता में आए हमें 13 महीनों का वक्त हो चुका है और मुझे नहीं लगता है कि अब पुरानी सरकार पर दो’ष डालने का कोई मतलब है। अब हमारी जवाबदेही तय होनी चाहिए”

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