तुलसीपुर विधानसभा इस समय बलरामपुर शहर की सबसे चर्चित विधानसभा बनी हुई है. फ़िलहाल यहाँ भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला विधायक हैं. पिछले चुनाव में वो एक त्रिकोणीय मुक़ाबले में जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर खड़ी हुईं ज़ेबा रिज़वान को 18 हज़ार से अधिक मतों से हराया था, तीसरे नम्बर पर पूर्व विधायक और सपा नेता मशहूद ख़ान थे.

इस सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो सन 1974 के विधानसभा चुनाव में यहाँ से भारतीय जनसंघ के नेता मंगरे सिंह चुनाव जीते. सन 1977, 1980 और 1985 में जब चुनाव हुए तो यहाँ से कांग्रेस के टिकट पर मंगल देव ने विजयी पताका फहरा दी. इसके बाद कांग्रेस यहाँ कमज़ोर होती गई, क्षेत्रीय नेता उभर कर आने लगे और बाहुबली राजनीति का एक दौर तुलसीपुर में शुरू हुआ.

सन 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी रिज़वान ज़हीर उर्फ़ रिज्जू भैया की जीत हुई. 1991 में इस सीट से भाजपा के कमलेश कुमार जीते. निर्दलीय चुनाव जीतकर अपने आपको साबित करने वाले रिज़वान ने 1993 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 1996 में फिर रिज़वान जीते, इस बार उनके पास बसपा का टिकट था. इसके बाद रिज़वान ज़हीर ने सपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा और वो सांसद चुन लिए गए.

सन 2002 में यहाँ से अब्दुल मशहूद ख़ान सपा के टिकट पर लड़े और चुनाव जीते. 2007 में भाजपा ने इस सीट पर वापसी की और कौशलेन्द्र नाथ योगी ने क़रीबी मुक़ाबले में सपा के मशहूद ख़ान को शिकस्त दी. 2012 की सपा लहर में मशहूद ख़ान ने बाज़ी मारी और विधानसभा में अपनी वापसी की. 2017 में भाजपा की प्रचंड लहर चली और भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला विजयी हुए.

तुलसीपुर में मतदाताओं की संख्या 3, 69,751 है जिसमें पुरुष 2,02,481 और महिलाएँ 1,67,270 हैं. जातिगत समीकरण की बात करें तो यहाँ ब्राह्मण, मुस्लिम और ओबीसी आबादी काफ़ी अधिक है. यहाँ ओबीसी 35% हैं जबकि सामान्य 19%, मुस्लिम आबादी 22% और अनुसूचित जाति की यहाँ 23% के क़रीब आबादी है.

इस बार के चुनाव में मुक़ाबला सपा और भाजपा के बीच ही लग रहा है. भाजपा ने तो अपने प्रत्याशी का एलान कर दिया है जबकि सपा ने अभी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है. भाजपा की ओर से कैलाश नाथ शुक्ला को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि सपा से कई नेता उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं.