बता दें कि भारतीए क्रिकेट टीम में सौरव गांगुली के कप्तानी छोड़ने के बाद बीसीसीआई (BCCI) ने टीम की कप्तानी करने का मौका सचिन (sachin Tendulkar) को दिया। लेकिन सचिन ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कप्तानी एम एस धोनी (MS Dhoni) को देने का सुझाव रखा। धोनी की काबिलियत का खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि “स्लिप में खड़े रहकर महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के क्रिकेटिया कौशल को अच्छी तरह से परखने क मौका मिला जिससे मझे लगा कि वह भारतीय कप्तानी के लिये तैयार हैं और 2007 में जब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने मुझसे सलाह मांगी तो मैंने इस विकेटकीपर का नाम सुझाया था।

तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) ने उस साल पहले आईसीसी टी20 विश्व कप में जूनियर खिलाड़ियों को मौका देने का निर्णय किया और बीसीसीआई ने तब मास्टर ब्लास्टर से कप्तानी के लिये अपनी पसंद बताने के लिये कहा था। ऐसे आड़े समय सचिन (Sachin Tendulkar) ने जब तत्कालीन बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष शरद पवार को एमएस धोनी (MS Dhoni) का नाम सुझाया था। जिसको सुन कर पावर हैरान रह गए और फिर उन्होंने अपनी बात रखी। आखिर हुआ वहीं जिसकी सलाह सचिन ने दी। सचिन ने पूर्व कप्तान धोनी के संन्या’स लेने पर कहा कि “मैं इसके विस्तार में नहीं जाऊंगा कि यह कैसे हुआ हां लेकिन जब मुझसे (बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों ने) पूछा गया तो मैंने बताया कि मैं क्या सोचता हूं।” उन्होंने कहा कि, “मैंने कहा था कि मैं दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर नहीं जाऊंगा क्योंकि मैं तब कुछ चोटों से परे’शान था, लेकिन तब मैं स्लिप कॉर्डन में क्षेत्ररक्षण करता था और धोनी से बात करता रहता था और मैंने तब समझा कि वह क्या सोच रहा है, क्षेत्ररक्षण कैसे होना चाहिए और तमाम पहलुओं पर मैं बात करता था।”

सचिन ने कहा कि “मैंने उसकी मैच की परिस्थितियों के आकलन करने की क्षमता देखी और इस नतीजे पर पहुंचा कि उसके पास बहुत अच्छा क्रिकेटिया दिमाग है। इसलिए मैंने बोर्ड को बताया कि मुझे क्या लगता है। धोनी को अगला कप्तान बनाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि “मैं जो कुछ सोच रहा था और उसकी जो सोच थी, वह काफी हद तक मिलती-जुलती थी। अगर मैं आपको किसी बात के लिये मना लेता हूं तो हमारी राय एक जैसी हो जाएगी और धोनी के साथ यह बात थी। हम दोनों एक तरह से सोचते थे और इसलिए मैंने उनके नाम का सुझाव दिया।” बता दें कि धोनी को भारतीए क्रिकेट टेस्ट टीम की कप्तानी तब दी गई जब टीम में और भी सीनियर खिलाड़ी शामिल थे।

वहीं तेंदुलकर से पूछा गया कि धोनी किस तरह अपने साथ सीनियर खिलाड़ियों को लेकर चलते थे? तो उन्होंने बताया कि “मैं केवल अपनी बात कर सकता हूं कि मेरी कप्तान बनने की कोई इच्छा नहीं थी। मैं आपसे यह कह सकता हूं कि मैं कप्तानी नहीं चाहता था और मैं टीम के लिये हर मैच जीतना चाहता था। कप्तान कोई भी हो मैं हमेशा अपना शत-प्रतिशत देना चाहता था। मुझे जो भी अच्छा लगता था मैं कप्तान के सामने उसे रखता था। फैसला कप्तान का होता था, लेकिन उसके कार्यभार को कम करना हमारा कर्तव्य होता है।” उन्होंने कहा कि “अगर प्रत्येक खिलाड़ी अपनी भिन्न क्षमताओं से योगदान देता है तो कप्तान का भार कम हो जाता है। मुख्य विचार एक दूसरे की मदद करना था। जब 2008 में धोनी कप्तान बना तब मैं लगभग 19 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बिता चुका था। इतने लंबे समय तक खेलने के बाद मैं अपनी जिम्मेदारी को समझता था।”

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