जो लोग सजदे में कर लेते हैं ऑंखें बंद, वो एक बार अल्लाह के इस फरमान को ज़रूर पढ़े..

October 4, 2021 by No Comments

अस्सलाम वालेकुम, दोस्तों कहा जाता है कि अल्लाह इ’स्ला’म में दो तरह के लोग पाए जाते हैं। जो लोग अ’ल्लाह में यकीन रखते हैं उन्हें ईमान वाला शख्स कहा जाता है और जो लोग अ’ल्लाह में यकीन नहीं रखते उन्हें का’फि’र कहा जाता है। का’फि’रों और मु’स्लि’म के दरमियां फर्क करने वाली बहुत चीजें हैं लेकिन एक चीज न’मा’ज भी है।

हजूर ने फरमाया है कि हमारे न’बी ए करीम स’ल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया कि इंसान और उसके कु’फ्र और शि’र्क के दौरान न’मा’ज ना पढ़ने का फर्क है। आपको बता दें कि इ’स्लाम में यह कहा जाता है कि कोई फ’र्ज न’मा’ज़ जा’नबूझ’कर ना छोड़े। जिसमें इरादतन न’मा’ज छोड़ी उसने कु’फ्र किया और अ’ल्ला’ह उससे ना’रा’ज हो गया।

ईमान और कु’फ्र में एक बहुत ही बारिक लाइन है जो की न’माज’ है। न’माज इ’स्लाम और मु’सलमा’नों के लिए बहुत ही अहम है। लोग अक्सर यह सवाल करते हैं कि नमा’ज के दौरान आँख बंद कर लेना कैसा है। गौरतलब है कि बहुत से मु’स्लि’म भाई न’माज पढ़ने के दौरान अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं।

तो ऐसे लोगों के बारे में श’रीयत में क्या कहा गया है, आइए आपको बताते हैं। आपको बता दें कि न’मा’ज के दौरान आंखें बंद करना म’करूह ए तरजीही है। इसकी वजह यह है कि ह’जूर ने फरमाया है कि न’मा’ज में आंखों को बंद करने से म’ना फ़रमाया है और इससे जुड़ी सुन्नत यह है कि अपने आंखों को अपने सजदे की जगह में रखा जाए लेकिन अगर किसी शख्स को आंख करनी पड़ती है तो इसमें कोई परेशानी नहीं है। आंख बंद करके भी न’मा’ज पढ़ी जा सकती है।

आंख बंद करना उस वक्त म’करूह ए तरजीही है। जब वह किसी मकसद के बगैर या किसी मतलब के बिना अपनी आंखों को बंद करके न’माज पढ़े। तो ऐसी सूरत में आंख बंद करके न’माज पढ़ना म’करूह ए त’र’जीही है। तो अब आप लोग ये जान चुके हैं कि आंख बन्द कर के न’मा’ज़ पढ़ना कैसा है। नमाज़ में आंख कब बन्द कर सकते हैं?

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