राज्यसभा की 57 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. इन 57 में से 11 सीटें उत्तर प्रदेश में हैं, उत्तर प्रदेश में जो समीकरण हैं उसके मुताबिक़ सपा का तीन और भाजपा का 7 सीटों पर जीतना तय है जबकि एक सीट पर सपा और भाजपा का मुक़ाबला हो सकता है. राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही सपा में अपने तीन उम्मीदवार कौन होंगे इसको लेकर हलचल बनी हुई थी.

इसमें कई लोगों के नाम चर्चा में थे लेकिन पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार कपिल सिब्बल को समर्थन दिया और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को भी पार्टी का समर्थन देकर राज्यसभा पहुँचाना तय किया. सपा ने जावेद अली ख़ान को राज्यसभा का टिकट दिया है. देखा जाए तो तीन में से एक ही सीट सपा नेता को मिली है बाक़ी दो सीटें सपा ने अपने नेता को न देकर रालोद और निर्दलीय को दी हैं.

इसके पीछे क्या कारण है इसको समझते हैं. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पिछले लम्बे समय से आज़म ख़ान की नाराज़गी की ख़बरें सुन रहे थे. उन्होंने आज़म से संपर्क करने की कोशिश की तो आज़म से तो विशेष बात नहीं हो पायी लेकिन आज़म के बेटे अब्दुल्ला आज़म से बीस मिनट तक चर्चा हुई.

अखिलेश को मालूम हुआ कि आज़म चाहते हैं कि पूर्व कांग्रेस नेता और आज़म के वकील कपिल सिब्बल को राज्यसभा भेजने में मदद की जाए. अखिलेश इस बात पर तुरंत मान गए. अखिलेश यादव ने कपिल सिब्बल को टिकट देकर एक तो आज़म को ख़ुश कर दिया, दूसरा सिब्बल को टिकट देकर दिल्ली तक अपनी एहमीयत साबित कर दी.

प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव की सिफ़ारिश पर अखिलेश ने जावेद अली ख़ान को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया. जावेद, राम गोपाल के क़रीबी हैं और पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं. वो 2014 से 2020 तक राज्यसभा सदस्य रहे थे लेकिन 2020 में सपा विधायकों की संख्या काफ़ी कम थी, इसलिए जावेद को प्रत्याशी नहीं बनाया जा सका था.

सपा की ओर से ऐसी ख़बरें आ रही थीं कि तीसरी सीट पर अखिलेश अपनी पत्नी डिम्पल यादव को राज्यसभा का प्रत्याशी बना सकते हैं. हालाँकि इन ख़बरों के आते ही रालोद समर्थक काफ़ी नाराज़ दिखे. रालोद चाहती थी कि पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा जाए. सपा ने डिम्पल को टिकट दिए जाने की ख़बरों को ग़लत बताया और ख़बर आयी कि सपा-रालोद गठबंधन की ओर से जयंत चौधरी प्रत्याशी होंगे. जयंत को राज्यसभा भेजकर अखिलेश ने अपने गठबंधन को मज़बूत किया है. सपा के इस क़दम की तारीफ़ की जा रही है.

बिहार में भी पाँच सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने हैं. इन पाँच में से 2 सीटें भाजपा, 2 सीटें राजद और एक सीट जदयू के खाते में जाती दिख रही है. राजद ने अपने दोनों उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. राजद ने फ़ैयाज़ अहमद और मीसा भारती को राज्यसभा भेजने का फ़ैसला किया है. मीसा भारती इसके पहले भी राज्यसभा सांसद थीं और उनका कार्यकाल 7 जुलाई को समाप्त हो रहा है. मीसा भारती पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं.

वहीं फ़ैयाज़ अहमद पार्टी के विधायक रह चुके हैं. फ़ैयाज़ पहली बार राज्यसभा सांसद चुने जाएँगे. बिहार और उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी है. यहाँ 6 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होंगे. इनमें से भाजपा को 3 और महाविकास अघाड़ी को भी तीन सीटें मिलेंगी. महा विकास अघाड़ी में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक-एक सीट मिल रही है. शिवसेना ने अपनी ओर से संजय राउत को उम्मीदवार बनाने का फ़ैसला किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से प्रफुल्ल पटेल को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. राउत और पटेल दोनों वरिष्ठ नेता माने जाते हैं. कांग्रेस और भाजपा ने अब तक अपने उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है.

अन्य राज्यों की बात करें तो पंजाब में दो सीटों के लिए चुनाव होने हैं और इन दोनों पर ही आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार जीतने की संभावना है. आन्ध्र प्रदेश की चार सीटों पर चुनाव होंगे जिनमें सभी सीटें वाईएसआर पार्टी को मिलेंगी. तेलंगाना की दो सीटें हैं, दोनों सीटों पर टीआरएस चुनाव जीतेगी. छत्तीसगढ़ की दो सीटें चुनाव के लिए जा रही हैं, इन दोनों पर कांग्रेस को जीत मिलेगी.

मध्य प्रदेश की तीन सीटें हैं, इनमें से दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का उम्मीदवार विजयी होगा. तमिल नाडू में 6 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होंगे जिनमें से तीन पर डीएमके और दो पर एआईएडीएमके विजयी होगी, एक सीट कांग्रेस के खाते में जा रही है. कर्णाटक में चार सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे, यहाँ तीन भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाएगी. कर्णाटक से भाजपा ने एक उम्मीदवार केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण को बनाया है.

ओड़िसा में तीन सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे, तीनों पर बीजू जनता दल का प्रत्याशी विजयी होगा. राजस्थान में चार सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होंगे, दो कांग्रेस और दो भाजपा को मिलेंगी. उत्तराखंड में एक सीट है, ये सीट भाजपा को मिलेगी. झारखण्ड की दो में एक भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाएगी, हरियाणा की दो सीटों में एक भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाएगी.

सभी सीटों की बात करें 57 में से 25 सीटें भाजपा के पास थीं लेकिन चुनाव के बाद भाजपा के पास 23 सीटें रह जाएँगी, वहीं कांग्रेस के पास चुनाव से पहले 8 सीटें हैं और चुनाव के बाद 10 सीटें रह जाएँगी. अन्य पार्टियों की बात करें तो बसपा को दो सीटों का नुक़सान होगा और वो इस चुनाव में कोई सीट नहीं जीत पाएगी.

सपा के पास तीन सीटें हैं लेकिन चुनाव के बाद उसे ख़ुद को एक ही सीट से संतोष करना होगा जबकि एक उसके सहयोगी और एक उसके समर्थन से निर्दलीय के खाते में जाएगी. आंध्र प्रदेश की वाईएसआर पार्टी की रिटायर हो रहे सदस्यों में एक सीट थी लेकिन अब उसको चार सीटें मिलेंगी. ये आँकड़े इस आधार पर बताये जा रहे हैं जबकि कोई बड़ी बग़ावत किसी पार्टी के विधायकों के समूह की तरफ़ से न हो.