लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दिन ब दिन चुनावी सरगर्मियां बढ़ रही हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में मुक़ाबला भाजपा और सपा के बीच होगा लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि बसपा में अभी भी करिश्मा करने की क्षमता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है. हालाँकि जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आ रहा है वैसे वैसे ही गठबंधन बनने और बिगड़ने का सिलसिला शुरू होने लगा है.

राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे हैं तो नेता अपने सियासी भविष्य के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशने में जुट गए हैं। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सत्तासीन है, लेकिन दल बदल करने वाले नेताओं का राजनीतिक ठिकाना और पहली पसंद सपा बनती जा रही है। इसी बीच गुरूवार को भाजपा, बसपा और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।
Akhilesh Yadav
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने यहां बताया कि जनसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता दीपक कुमार अग्रवाल अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और सभी ने वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी की बहुमत की सरकार बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बसपा से राम निवास उपाध्याय और भाजपा से कांतिप्रभा, राम दयाल तथा त्रिभुवन गुप्ता समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं।

बताया जाता है कि अग्रवाल कभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी सहयोगी हुआ करते थे। दीपक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि योगी के शासन में उत्तर प्रदेश की हालत बहुत खराब हो गई है और समाज में धार्मिक विभाजन की खाई और चौड़ी हो गई है।

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