मुंबई. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस सत्ता जाने के बाद अब मुश्किल में फंसते नज़र आ रहे हैं. मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अब उन्हें अदालत की तरफ़ से समन जारी किया है. इस बात की पुष्टि नागपुर (सदर) के पुलिस निरीक्षक महेश बंसोड़े ने दी. उन्होंने बताया कि कोर्ट का समन देवेंद्र फडणवीस को दिया जा चुका है. यह समन उन्हें चुनावी हलफनामे में खुद पर चल रहे दो आपराधिक मामलों की जानकारी को छुपाने के संबंध में है.

भाजपा नेता देवेन्द्र फडनवीस के ऊपर ये आरोप लगा था कि साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव के वक़्त उन्होंने अपने हलफ़नामे में ख़ुद पर चल रहे दो अपराधिक मामलों की कोई जानकारी नहीं दी थी. याचिकाकर्ता की दलील थी कि फडणवीस ने ऐसा कर के जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 125A का उल्लंघन किया है. इस संबंध में लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट ने कहा था कि फडणवीस के ख़िलाफ़ पहली नजर में कोई मामला नहीं बनता है.

devendra Fadnvis

याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्रत्याशी के लिए सभी आप’राधिक मामलों की जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है. इस पर फडणवीस सरकार की तरफ से सफाई दी गई कि, पहला मामला डिफेमेशन का है, जिसमें होईकोर्ट ने सीएम देवेंद्र फडणवीस को राहत दी थी. वहीं दूसरा मामला स्लम प्रॉपर्टी पर टैक्स को लेकर है. ये दोनों ही मामले जनहित में थे इनमें कोई पर्सनल हित में नहीं था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया.

सर्वोच्च अदालत ने उच्च न्यायलय का आदेश रद्द कर दिया और फडणवीस को मामले में सुनवाई का सामना करने का आदेश दिया. ‘सामना’ में भी पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस पर निशाना साधा गया है. इसमें कहा गया है कि पिछली सरकार पांच साल रही और पांच लाख करोड़ का कर्जा रखा दिया. अखबार ने लिखा है, ‘महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार सत्य और न्याय की सारी कसौटियों पर खरी उतरकर स्थिर रहेगी. पांच साल में राज्य पर पांच लाख करोड़ का कर्ज लादकर फडणवीस सरकार चली गई. इसलिए नए मुख्यमंत्री ने जो संकल्प लिया है, उस पर तेजी से लेकिन सावधानी पूर्वक कदम रखना होगा.’

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