महाराष्ट्र भाजपा में अब बग़ावत के सुर तेज़ होते दिख रहे हैं. राज्य में जबसे भाजपा की सत्ता गई है कई ऐसे नेता हैं जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं. इनमें कुछ ऐसे नेता भी हैं जो चुनाव से पहले कांग्रेस या एनसीपी से भागकर आये थे. भाजपा इस बात से तो परेशान ही है लेकिन उसके लिए पंकजा मुंडे की बग़ावत बड़ी परेशानी खड़ी कर रही है. जानकारों की मानें तो देवेन्द्र फडनवीस का गुट चाहता है कि मुंडे पार्टी छोड़ दें.

ऐसा होने पर देवेन्द्र फडनवीस का पार्टी में एक विरोधी कम होगा. परन्तु पंकजा मुंडे ने पार्टी छोड़ने की बात से इनकार कर दिया है. गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और अपने पिता गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर पंकजा ने एक दिन के भूख हड़ताल की घोषणा की. पंकजा ने कहा कि वो पार्टी नहीं छोड़ेंगी लेकिन पार्टी यदि चाहे तो वो उनपर फ़ैसला ले सकती है. उन्होंने कहा कि वो 27 जनवरी को औरंगाबाद में एक दिन के लिए सांकेतिक भूख हड़ताल पर रहेंगी.

उन्होंने दावा किया कि ये हड़ताल किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी के ख़िलाफ़ नहीं है.उनका कहना है कि वो मराठवाड़ा के लंबित मुद्दों की तरफ पार्टी का ध्यान दिलाने के लिए ऐसा करेंगी. पंकजा मुंडे ने गुरुवार को ये बातें बीड के परली में गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर बुलाई गई सभा में कही. पंकजा ने कहा कि वो समूचे महाराष्ट्र का दौरा कर गोपीनाथ मुंडे के नाम पर बने संगठन के लिए काम करेंगी. मुंडे की सभा में भाजपा का चुनाव चिन्ह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ़ोटो कहीं नज़र नहीं आया.

पंकजा की बहन और स्थानीय बीजेपी सांसद प्रीतम मुंडे से बैनरों में प्रधानमंत्री, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और महाराष्ट्र के वरिष्ठ पार्टी नेताओं की तस्वीरें नहीं होने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो गोपीनाथ मुंडे की छवि को किसी विशेष राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रखना चाहते. आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे को बीड ज़िले की परली सीट पर एनसीपी उम्मीदवार धनञ्जय मुंडे से हार का सामना करना पड़ा था. राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा आम रही कि इसके पीछे भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेन्द्र फडनवीस का हाथ है, वो नहीं चाहते थे कि पंकजा चुनाव जीतें.

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