सऊदी अरब ने तुर्की के सामने रखी थी शर्त, एरदोगन ने मान ली तो अदालत ने…

पश्चिम एशिया एक ऐसा क्षेत्र है जिससे वैश्विक राजनीति सीधे प्रभावित होती है. इस क्षेत्र में कई ऐसे देश हैं जिनकी चर्चा वैश्विक राजनीति में अक्सर होती है, इन्हीं में से दो देश तुर्की और सऊदी अरब भी हैं. सऊदी अरब और तुर्की दोनों यूँ तो मुस्लिम बाहुल्य देश हैं लेकिन दोनों में बहुत अंतर भी है. सऊदी अरब इस्लामिक राजशाही पर चलने वाला देश है तो तुर्की सेक्युलर गणराज्य है.

सऊदी अरब में आज भी पुरानी परम्पराएँ आम हैं वहीं तुर्की आधुनिक चाल-चलन पर चलने वाला देश है. सऊदी अरब और तुर्की दोनों ही अमरीका के दोस्त माने जाते हैं लेकिन दोनों में आपसी मतभेद भी अक्सर नज़र आते हैं. ताज़ा विवाद जमाल ख़शोजी की ह’त्या को लेकर हुआ था. ख़शोजी सऊदी अरब के नागरिक थे और वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार थे.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ख़शोजी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की कई मुद्दों पर आलोचना कर चुके थे, इस वजह से मुहम्मद बिन सलमान उनसे नाराज़ थे. ख़शोजी मानते थे कि सऊदी अरब में उनकी जान को ख़तरा है, इसीलिए वो तुर्की में रह रहे थे. तुर्की के शहर इस्तांबुल में वो सऊदी कांसुलेट कुछ डाक्यूमेंट्स लेने के लिए गए थे.

इसके बाद कांसुलेट से वो कभी वापिस नहीं आए. उनकी मंगेतर उनका इंतज़ार कांसुलेट के बाहर कहीं कर रही थीं लेकिन ख़शोजी फिर कभी नहीं आए. इसके बाद ये ख़बरें आने लगीं कि कांसुलेट के अन्दर उनकी ह’त्या कर दी गई है. ये घटना 2 अक्टूबर 2018 की है. आपको बता दें कि किसी भी देश के कांसुलेट में दाख़िल होने के लिए पुलिस को स्पेशल परमिशन चाहिए होती है.

सऊदी अरब सरकार लगातार मना करती रही कि ख़शोजी के ग़ायब होने से उनका कोई लेना देना नहीं है. हालाँकि CCTV कैमरों से ये साफ़ हो गया कि ख़शोजी कांसुलेट में गए तो हैं पर बाहर नहीं आए. ख़शोजी की मंगेतर ने अमरीकी सरकार से भी अपने मंगेतर को ढूँढने का प्रयास करने के लिए कहा. 20 अक्टूबर को सऊदी अरब ने माना कि तुर्की स्थित सऊदी कांसुलेट में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों का ख़शोजी से झगड़ा हुआ जिसके बाद ख़शोजी कि ह’त्या कर दी गई.

इसमें कई लोगों के नाम आए लेकिन पश्चिमी मीडिया लगातार ये इशारा करती रही कि इस ह’त्या में सऊदी क्राउन प्रिंस का हाथ है. हालाँकि सऊदी सरकार ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया और माँग की कि इस केस को सऊदी अरब ट्रान्सफ़र किया जाए. सऊदी अरब की ओर से तर्क दिया गया कि मारने वाले और मरने वाला दोनों सऊदी अरब के नागरिक हैं और हादसा भी सऊदी कांसुलेट में हुआ जो सऊदी क्षेत्र में माना जाएगा.

हालाँकि तुर्की ने इस बात को नहीं माना. राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने इस मुद्दे पर कहा कि जो भी इस ह’त्या में शामिल हैं उनको सज़ा मिलेगी. तुर्की ने कहा कि उनके देश की अदालत ही इस मुक़दमे का भविष्य तय करेगी. इस पूरे मामले में अब बड़ी ख़बर आ रही है. ख़बर है कि तुर्की की एक अदालत ने केस को सऊदी अरब ट्रान्सफर कर दिया है.

ह’त्या के आरोपी 26 लोगों की अनुपस्थिति में मुक़दमे को निलंबित कर दिया गया और मामला सऊदी अरब स्थानांतरित कर दिया गया. आरोपी सभी 26 लोग सऊदी अरब के नागरिक हैं. मानवाधिकार समूहों की लम्बे समय से माँग थी कि इस केस को सऊदी अरब न ट्रान्सफर किया जाए क्यूँकि उन्हें ये डर है कि ऐसा होने पर इन्साफ नहीं मिल सकेगा.

कुछ जानकार मानते हैं कि तुर्की सरकार ने इस मामले को सऊदी अरब न ट्रान्सफर किया जाए इसके लिए विशेष कोशिश नहीं की. इसका कारण है कि अब तुर्की सऊदी अरब से सम्बन्ध सुधारना चाहता है. इस मामले की वजह से दोनों देशों के सम्बन्ध ख़राब हो गए थे. सऊदी अरब ने तुर्की के सामने ये शर्त भी रखी थी कि संबंध सुधारने के लिए इस मामले का हल ज़रूरी है.

आपको बता दें कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को ही असली बादशाह माना जाता है. किंग सलमान 86 साल के हो गए हैं और उन्होंने पहले ही मुहम्मद बिन सलमान को उत्तराधिकारी बना दिया है. हालाँकि मुहम्मद बिन सलमान ने जब से राजनीति में क़दम रखा है तब से वो विवादों में फंसते रहे हैं.

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