साइंस हमें कहां से कहां ले आई….पहले हकीम हाथ पकड़ बीमारी बता देता था, अब डॉक्टर सारी जांचे के बाद भी….

September 21, 2022 by No Comments

पहले वह कुएं का मैला और मटमैला पानी पीकर सौ साल जी लेते थे, अब नेश्ले प्योर लाइफ का शुद्ध साफ पानी पीकर भी 40 साल में बूढ़े हो रहे हैं । पहले घानी का मेला से तेल कहा कर और सर पर लगा कर बुढ़ापे में भी मेहनत कर लेते थे, अब डबल फ़िल्टर और नए प्लान्ट पर तैयार कोकिंग आयल और गजी में पका खाना खा कर जावानी में ही हांप रहे हैं

पहले वो डले वाले नमक खाकर बीमार ना पड़ते थे अब हम आयोडीन वाला नमक खाकर हाई और लो ब्लड प्रेशर का शिकार। पहले वह नीम बबूल कोयला और नमक से दांत चमकाते थे और 80 साल की उम्र तक भी चबा चबा कर खाते थे, अब कोलगेट और डॉक्टर टूथपेस्ट वाले रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते हैं।

पहले सिर्फ रूखी सूखी रोटी खाकर फिट रहते थे अब बर्गर चिकन कड़ाई शोरमा विटामिन और फूड सप्लीमेंट खाकर भी कदम नहीं उठाया जाता । पहले लोग पढ़ना लिखना कम जानते थे मगर जाहिल नहीं थे, अब मास्टर लेवल होकर भी जहालत की इंतिहा पर है।

पहले हकीम वैद्य नस पकड़ कर बीमारी बता देते थे अब स्पेशलिस्ट सारी जांच कराने पर भी बीमारी नहीं जान पाते हैं, पहले वो सात आठ बच्चे पैदा करने वाली माँ जिनको शायद ही डॉक्टर नसीब होता था 80 साल की होने पर भी खेतों में काम करती थी, अब डॉक्टर की देखभाल में रहते हुए भी ना वो हिम्मत ना वो ताकत रही।

पहले काले पीले गुड़ की मिठाईयां ठोस ठोस कर खाते थे, अब मिठाई की बात करने से पहले ही शुगर की बीमारी हो जाती है । पहले बुजुर्गों के कभी घुटने नहीं दुखते थे अब जवान भी घुटने और कमर दर्द का शिकार है।

पहले 100 वाट के बल्ब सारी रात जलाते और 200 वाट का टीवी चला कर भी बिजली का बिल ₹200 महीना आता था अब 5 वाट का एल ई डी एनर्जी सेवर और 30 वाट के एलईडी टीवी में 2,000 महीने से कम बिल नहीं आता। पहले खत लिख कर सबकी खबर रखते थे, अब टेलीफोन मोबाइल फोन इंटरनेट होकर भी रिश्तेदारों की कोई खैर खबर नहीं।

पहले गरीब और कम आमदनी वाले भी पूरे कपड़े पहनते थे, अब जितना कोई अमीर होता है उसके कपड़े उतने कम होते जाते हैं, समझ नहीं आता कि हम कहां खड़े हैं? क्यों खड़े हैं ? क्या खोया है क्या पाया ?

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