भाजपा में कई कद्दावर नेताओं के लिए खतरा बने सिंधिया! शिवराज सिंह को भी सताया…

July 31, 2021 by No Comments

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की राजनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय कैबिनेट में भी जगह दी गई है। जिसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद और भी बढ़ गया है।

जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में हुआ करते थे तब उन्हें राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। हालांकि बीते साल जिस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरा कर अपने 22 समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी जॉइन की उसने भारतीय राजनीति में उनका कद और बड़ा कर दिया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जहां बीजेपी में आकर कांग्रेस की मुश्किल बढ़ाई। वहीं मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह को सत्ता दिला कर उनकी मुश्किल आसान कर दी। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए। तो इससे सबसे बड़ा खतरा शिवराज सिंह चौहान को ही था। क्योंकि अब बीजेपी में दो ऐसे बड़े कद्दावर चेहरे हो गए थे। जो मुख्यमंत्री की दावेदारी पेश करने लायक थे।

माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी द्वारा केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जान में जान आई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच में शामिल होने से शिवराज सिंह चौहान को कोई खास खतरा नहीं था। बल्कि ग्वालियर और चंबल के क्षेत्र जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा माना जाता है। वहीं से बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा और नरेंद्र सिंह तोमर भी आते हैं।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने से ग्वालियर चंबल क्षेत्र में बीजेपी अब और मजबूत हो जाएगी। क्योंकि वहां नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े नेता पहले से ही अपनी पकड़ बना रहे थे। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद यह पकड़ और मजबूत हो जाएगी।

कहीं ना कहीं क्षेत्र में पार्टी के इन बड़े नेताओं के बीच आपसी मतभेद जरूर होते नजर आएंगे। उसका कारण है। दरअसल कोई भी नेता कितने भी बड़े पद पर क्यों ना पहुंच जाए लेकिन वह वहां तभी तक टिका रहता है जब तक उसकी पकड़ उसके क्षेत्र में होती है।

नरोत्तम मिश्रा हों, नरेंद्र सिंह तोमर हों या फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया। उन्हें पता है कि अगर उनके क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हुई तो ज्यादा दिनों तक वह राज्य और केंद्र की सियासत में टिक नहीं पाएंगे। जमीन एक है और उसके हकदार तीन, इसलिए इस ग्वालियर-चंबल की जमीन पर जिसकी पकड़ सबसे ज्यादा मजबूत होगी वही भविष्य में राजनीति में आगे जाएगा।

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