शेरशाह सूरी के दौर का वो पुल जो मात्र दो दिन में बनकर हुआ था, यह शाही पुल आज भी….

September 16, 2022 by No Comments

जनपद के हरबंशपुर में तमसा नदी पर बना शाही पुल ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है इस पुल का निर्माण शेरशाह सूरी ने सन 1530 में 2 दिन के भीतर उस समय कराया था, जब उसकी सेनाएं आजमगढ़ में आई थी और इन्हें जौनपुर जाना था . शेरशाह सूरी द्वारा बनवाए गए इव पल के बारे में कहा जाता है इस पुल का निर्माण दो दिन के भीतर कराया गया था इस पुल पर आज भी गाड़ियों का आवागमन जारी है।

400 साल पुराने इस पुल के बगल में एक दूसरे पुल का निर्माण हो गया है तो यह पुल इतिहास बनने की ओर अग्रसर है ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए आजमगढ़ डीएवी डिग्री कॉलेज के इतिहास के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. शौम्य सेन गुप्ता ने बताया कि उस समय आजमगढ़ व जौनपुर का रास्ता अहम था. यह पुल दोनों जिलों को जोड़ने का एक मात्र साधन था. इस शाही पुल का ऐतिहासिक निर्माण दो दिन के अंदर कराया गया था।

आपको बता दें जानकर कहते हैं देश के चंद सबसे पुराने चालू पुलों में से एक ये आज़मगढ़ शहर का शेरशाही पुल है। और इससे पुराना एक दिल्ली में है शेरशाह सूरी ने कुल दो पुल आज़मगढ़ में बनवाए थे। जबकि छोटी पुलिया तो अनेकों बनवाई थी एक पुल आज़मगढ़ शहर की तमसा नदी पर और दूसरा मंगई नदी पर मोहम्मदपुर में बनवाया था ।

कहते हैं सन् 1858 में अंग्रेज़ों ने आज़मगढ़ शहर में तमसा नदी पर दो पुल बनवाए थे एक हरबंशपुर में और दूसरा सिधारी पर बनवाया। वजह ये थी कि उनको लगा कि शेरशाही पुल पुराना हो गया। लेकिन हैरत ये कि अंग्रेज़ों का बनवाया हुआ हरबंशपुर का पुल सन् 1973 में जर्जर होकर गिर गया और सरकार ने तोड़वा डाला,अब उसका नामोनिशान नहीं मिलता,सिधारी वाला 1984 में गिर गया लेकिन शेरशाही पुल तब भी खड़ा रहा।

शेरशाही पुल के निर्माण में चूना, सुर्खी, गारा, गुड़, शहद, उड़द की दाल, कई किस्म की जड़ी -बूटियों सहित डाटदार पुल तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। कुआं बनाकर और कुआँ गलाकर बना है। आख़िर मज़बूत बनता भी क्यों नहीं,फ़रीद ख़ान उर्फ़ शेरशाह सूरी बनवा रहा था। कोई धाँधली करता तो खाल खिंचवा लेता था। न्यायप्रिय, बहादुर और ईमानदार था। ख़ैर,ये पुल धरोहर है लेकिन इसे धरोहर के रूप में संरक्षित करने की आज तक किसी सरकार की नियत नहीं बनी।

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