महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से गर्माहट हो गई है औरंगाबाद के नाम को बदलने पर सियासी गर्माहट तेज़ हो गई है,
शिवसेना औरंगाबाद का नाम बदलना चाहती है और कांग्रेस इसका विरोध कर रही है BMC चुनाव को देखते हुए अब राजनीतिक पार्टियां धीरे धीरे अपनी चाल चलना शुरू कर दिया है। शिवसेना द्वारा गुज’राती मत’दाताओं लुभाने के लिए एक सभा का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इसके बाद ने तत्काल इस पर तंज कस दिया। इसकी आलोचना करते हुए, भाज’पा नेता

राव’साहेब दानवे ने कहा है कि शिवसेना भविष्य में मुसल’मानों की भी सभा आयोजित कर सकते हैं। बता दें कि गुजराती वोटर्स परम्परागत रूप से भाजपा को वोट देते हैं, लेकिन अब इसमें जब शिव सेना ने सेंध लगानी शुरू कर दी है तो भाजपा बौ’खला गई है। राव साहब दानवे ने कहा कि, परप्रांतियों को लेकर शिवसेना की भूमिका कई बार सामने आ चुकी है। शिवसेना सुविधा के अनुसार अपनी भूमिका बदलती रहती है। अगर जरूरत पड़ी तो शिवसेना भविष्य में मु’स्लिम स’मुदाय के लिए भी सभा का आयोजन करवा सकती है, क्योंकि सत्ता के लिए उन्होंने पहले ही गठबंधन का धर्म तोड़ दिया है और गैर विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई है।

दानवे ने कहा, शिवसेना जल्द ही गुजराती भाइयों की एक सभा का आयोजन करेगी। जिसका टैगलाइन होगा, ‘मुंबई मा जलेबी ना फाफड़ा, उद्धव ठाकरे आपड़ा। शि’वसेना की तरफ से आयोजक हेमराज शाह को गुज’राती मतदाताओं को सेना में लाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस आयोजन के लिए गुजराती और मराठी भाषा में निमंत्रण पत्र छपवाए गए हैं। यह सभा 10 तारीख को जोगेश्वरी में होगी। कहा जा रहा है कि, इस मौके पर लगभग 100 गुजराती शिवसेना में शामिल होंगे। इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पारंपरिक भाजपा के वोटर्स को लुभाने में शिवसेना कितना सफल हो सकती है।

गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले शिवसेना के दक्षिण मुंबई मंडल प्रमुख पांडुरंग सकपाल ने भगवद गीता पाठ प्रतियोगिता की तर्ज पर मु’स्लिम समुदाय के बच्चों के लिए अ’जान प्रतियोगिता का आयोजन किया था। जिसके बाद से बीजेपी ने शिवसेना को घेर लिया था। यही नहीं पांडुरंग सकपाल ने कहा था कि अज़ान का विरोध करना गलत है। अ’ज़ान महाआरती की तरफ ही महत्वपूर्ण है और प्रेम और शांति का प्रतीक है।

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