पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी के अन्दर से कुछ ऐसी ख़बरें आ रही हैं जो पार्टी के लिए अच्छी नहीं कही जा सकतीं. ख़बर है कि पार्टी के कुछ मुस्लिम नेता पार्टी से नाराज़ हैं. ये नाराज़गी कुछ नेता खुलकर भी दिखा रहे हैं. इस बीच सपा की मुस्लिम राजनीति का केंद्र माने जाने वाले आज़म ख़ान से कई नेताओं के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है.

आज़म फ़िलहाल जेल में हैं और उनसे मिलने कई वरिष्ठ नेता जेल पहुँचे हैं. इन नेताओं में प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव भी शामिल हैं. ऐसा माना जा रहा है कि शिवपाल यादव अपने भतीजे अखिलेश यादव से नाराज़ हैं और ऐसे में वो नए राजनीतिक समीकरण तलाश कर रहे हैं. सपा से जो मुस्लिम नेता जा रहे हैं वो क्यूँ जा रहे हैं और इसके पीछे इन नेताओं की क्या मंशा है इसको समझने की कोशिश करते हैं.

वरिष्ठ समाजवादी डॉक्टर शफ़ीक़ उर रहमान सपा के सांसद हैं लेकिन एक बयान के ज़रिए उन्होंने अपनी ही पार्टी पर हमला बोल दिया. उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यों से वह संतुष्ट नहीं हैं। भाजपा सरकार मुसलमानों के हित में काम नहीं कर रही है। भाजपा को छोड़िए समाजवादी पार्टी ही मुसलमानों के हितों में काम नहीं कर रही।

वहीं समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां ने 10 अप्रैल को बयान दिया। रामपुर में उन्होंने कहा कि जेल में बंद आजम खां के जेल से बाहर न आने की वजह से हम लोग सियासी रूप से यतीम हो गए हैं। हम कहां जाएंगे, किससे कहेंगे और किसको अपना गम बताएं? उन्होंने कहा कि उनके साथ समाजवादी पार्टी भी नहीं है.

वह कहते हैं,”हमारे नेता मुहम्मद आजम खां ने अपनी जिंदगी सपा को दे दी, लेकिन सपा ने आजम खां के लिए कुछ नहीं किया। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को हमारे कपड़ों से बदबू आती है।” डॉ. मसूद अहमद भी एक नाम हैं जो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से नाराज़ हैं. वो कहते हैं कि अखिलेश यादव का तरीक़ा तानाशाहों वाला है.

सहारनपुर के सपा नेता सिकंदर अली ने पार्टी छोड़ दी. पार्टी छोड़ते हुए सिकंदर ने कहा कि हमने दो दशक तक सपा में काम किया है। सपा अध्यक्ष कायर की तरह पीठ दिखाने का काम कर रहे हैं। मुस्लिमों की उपेक्षा की जा रही है। सिकंदर ने कहा कि सपा के बड़े-बड़े मुस्लिम नेता जेलों में बंद हैं लेकिन अखिलेश यादव की चुप्पी पीड़ा पहुंचाने वाली है।

मुलायम सिंह यूथ बिग्रेड सहारनपुर के जिला उपाध्यक्ष अदनान चौधरी ने भी अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अदनान चौधरी का कहना है कि मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार पर अखिलेश यादव की चोंच बिल्कुल बंद है। सुल्तानपुर के नगर अध्यक्ष कासिम राईन ने भी अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने में कोई रुचि नहीं है। आजम खां का पूरा परिवार जेल में डाल दिया गया पर अखिलेश यादव नहीं बोले। नाहिद हसन को जेल में डाल दिया गया और शहजिल इस्लाम का पेट्रोल पंप गिरा दिया गया लेकिन सपा अध्यक्ष ने इस पर आवाज नहीं उठाई।

कुछ और भी नेता हैं जो दावा कर रहे हैं कि अखिलेश यादव को मुसलमानों के मुद्दे पर बोलने में हिचक हो रही है. पार्टी शुभचिंतक मानते हैं कि अखिलेश को इन मुद्दों पर खुलकर सामने आना चाहिए. सपा फाउंडर और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव इन मुद्दों पर हमेशा खुलकर बोला करते थे लेकिन अखिलेश ऐसा करने से बचते रहे हैं.

अखिलेश यादव का विरोध मुस्लिम नेता तीन बातों को लेकर प्रमुखता से कर रहे हैं. मुस्लिम वर्ग का कहना है कि मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। उन पर हो रही कार्रवाई के खिलाफ अखिलेश कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं। यहां तक की एक बार भी इसको लेकर अखिलेश ने बयान नहीं दिया। दूसरी बात ये है कि मुस्लिम नेता मानते हैं कि आज़म ख़ान को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाना चाहिए था लेकिन अखिलेश ने ऐसा नहीं किया.

मुलायम सिंह यादव जब चुनाव हारे थे तो उन्होंने भी आज़म को नेता प्रतिपक्ष बनाया था. अखिलेश ने ख़ुद ही नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी संभाली है. तीसरी वजह कही जा रही है कि सपा को सबसे अधिक वोट मुस्लिम समुदाय का मिला लेकिन मुस्लिमों के ही मुद्दे पर अखिलेश का न बोलना परेशानी खड़ी करता है.

आज़म ख़ान की नाराज़गी की ख़बरें जबसे मीडिया में आयी हैं तब से ही आज़म के इर्द गिर्द विपक्ष की दूसरी पार्टियों के नेताओं का आना जाना लगा हुआ है. आज़म से मिलने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी भी गए वहीं कांग्रेस कह रही है कि अगर आज़म उनकी पार्टी में आ जाएँगे तो उन्हें राष्ट्रीय नेता बना दिया जाएगा. AIMIM पहले ही प्रदेश अध्यक्ष का पद देने की बात कह चुकी है तो मायावती भी मानती हैं कि अगर आज़म उनकी पार्टी में आ जाएँ तो पार्टी के लिए अच्छा रहेगा.