लखनऊ: उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां चुनाव के बाद भी सियासी गतिविधियाँ उसी तरह चलती हैं जैसे कि चुनाव चल रहा हो. चुनाव संपन्न होने के बाद ऐसी ख़बरें आयीं कि सपा के अन्दर शिवपाल यादव को बड़ा पद दिए जाने या न दिए जाने को लेकर विवाद है. प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव सपा से विधायक हैं और जानकारों की माने तो वो सपा में ही कोई बड़ा पद चाहते हैं.

पहले ऐसी ख़बरें आयीं कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया जा सकता है लेकिन सपा नेतृत्व ने ये कहकर इस बात को टाल दिया कि शिवपाल सपा के नहीं प्रसपा के नेता हैं. अब शिवपाल को लेकर एक बड़ी ख़बर आ रही है. असल में ऐसी ख़बरें तेज़ थीं कि सपा विधायक शिवपाल यादव भाजपा नेताओं से मिलने वाले हैं.

कुछ मीडिया हाउसेस ने दावा किया कि उनकी और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह की मीटिंग फिक्स हो गई है. हालाँकि ये सब बातें मीडिया में अपुष्ट ख़बरों की तरह से ही बताई गईं. वहीं शिवपाल यादव ख़ेमे से ऐसी ख़बरें थीं कि वो सपा के विधायक दलों की बैठक में न बुलाये जाने को लेकर नाराज़ थे. शिवपाल यादव ने इस बात को तो ख़ुद ही कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सपा उन्हें विधायक दलों की बैठक में बुलाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

सपा ने इस बाबत सफ़ाई दी कि शिवपाल प्रसपा के अध्यक्ष हैं इसलिए उन्हें सहयोगी दलों की बैठक में बुलाया जाएगा. सपा ने 29 मार्च को हुई सहयोगी दलों की बैठक में शिवपाल यादव को विशेष न्योता भेजा लेकिन शिवपाल इस मीटिंग में नहीं शामिल हुए. शिवपाल यादव के मीटिंग में न शामिल होने के बाद कई कयास लगने लगे.

कयास तो यहाँ तक चले कि शिवपाल यादव सपा के विधायक पद से इस्तीफ़ा देकर भाजपा में शामिल हो जाएँगे. परन्तु आज शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में शपथ ग्रहण किया. उन्होंने जसवंतनगर सीट से चुनाव जीता है. जसवंतनगर शिवपाल का गढ़ माना जाता है, यहाँ से उनकी बड़ी जीत हुई है. शिवपाल विधानसभा में जब आए तो काफ़ी संतुष्ट दिखे.

ऐसा लगता है कि शिवपाल यादव को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने मिलकर मना लिया है. वहीं जब ये हंगामा तेज़ था तब शिवपाल यादव ने कहा था, “मुझे बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मैंने सपा नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. इन परिस्थितियों में मेरा विधायक दल की बैठक में जाना सही नहीं होगा.”

शिवपाल ने कहा था, “मैंने हमेशा कहा है कि मुझे जो भी ज़िम्मेदारी दी जाएगी, मैं उसके अनुसार काम करूंगा, लेकिन मुझे विधायक दल की बैठक के लिए नहीं बुलाया गया, हालांकि मैं समाजवादी पार्टी से विधायक हूं.” अब जबकि ऐसा लग रहा है कि शिवपाल सपा में बने रहने वाले हैं, भाजपा समर्थकों और नेताओं को एक झ’टका मिलता हुआ दिख रहा है.