शिवपाल यादव ने अब किया ऐसा काम कि अखिलेश यादव को लग जाएगा बुरा, इसकी तो उम्मीद नहीं थी..

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच ऐसा मनमुटाव है जो अभी तक ख़त्म नहीं हो पाया है. यूँ तो कई साल गुज़र गए लेकिन कहीं न कहीं अखिलेश अपने चाचा के साथ सहज नहीं दिखते. शिवपाल यादव इस समय अपनी पार्टी प्रसपा के अध्यक्ष हैं लेकिन वो चाहते थे कि इसका विलय सपा में हो जाए.

अखिलेश इस बात पर राज़ी नहीं हुए. अब ख़बर है कि शिवपाल भाजपा से नज़दीकी बढ़ा रहे हैं. शिवपाल यादव ने अखिलेश से माँग की थी कि उनकी पार्टी का विलय सपा में हो जाए और कोई बड़ा पद सपा उन्हें दे लेकिन ऐसा होते नहीं दिखा तो शिवपाल भाजपा नेताओं से मिलने लगे. ऐसे में अटकलें तेज़ हो गईं कि वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

इस बीच अब शिवपाल यादव ने कुछ ऐसा कर दिया है जो सपा को और अखिलेश यादव को पसंद नहीं आएगा. शिवपाल यादव ने असल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ट्विटर अकाउंट फॉलो किया है. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ट्विटर हैंडल फॉलो किया है. इसके अलावा उन्होंने दिनेश शर्मा का भी ट्विटर अकाउंट फॉलो किया है. तीनों बड़े भाजपा नेता हैं, ऐसे में ये कयास ज़ोर पकड़ने लगे हैं कि क्या शिवपाल वाक़ई भाजपा में जा रहे हैं.

हालाँकि शिवपाल यादव ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का अकाउंट भी फॉलो किया है. ट्विटर पर इस गतिविधि के दो कारण हो सकते हैं. एक तो ये कि वो वाक़ई भाजपा ज्वाइन करने जा रहे हैं जिसके कयास लग ही रहे हैं और दूसरा ये कि वो अब ट्विटर पर अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहते हैं.

किस बात पर है विवाद?
समाजवादी पार्टी से लगातार नाराज़ चल रहे शिवपाल यादव को लेकर कल ऐसी ख़बरें आयीं कि वो अपना गठबंधन सपा से तोड़ लेंगे. उनकी पार्टी प्रसपा है और वो चाहते हैं कि सपा में इस पार्टी का विलय हो जाए लेकिन मुश्किल ये है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे. इसी सब विवाद में बात इतनी बढ़ गई कि ख़बरें यहाँ तक आने लगीं कि शिवपाल यादव जल्द ही भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं.

ऐसा माना जाता है कि ख़ुद अखिलेश तो शिवपाल को बड़ी ज़िम्मेदारी नहीं देना चाहते लेकिन अखिलेश के साथ जो लोग हैं वो भी यही चाहते हैं कि शिवपाल न आने पाएँ. इन लोगों को डर है कि अगर शिवपाल पार्टी में मज़बूत होंगे तो ये सभी लोग कमज़ोर हो जाएँगे. शिवपाल ने प्रसपा बना ली और दो बार इस पार्टी के रहते विधानसभा चुनाव भी हुआ.

परन्तु शिवपाल सपा के ही टिकट पर चुनाव लड़े. इसका अर्थ यही है कि शिवपाल सपा में ही रहना चाहते हैं और इसमें कोई पद चाहते हैं. शिवपाल ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर ऐसे संकेत तो दिए थे कि वो भाजपा में जा सकते हैं लेकिन ये सपा को डराने वाला ही क़दम नज़र आता है. शिवपाल यादव अब इंतज़ार में हैं कि अखिलेश यादव उनसे बात करें और कुछ उनकी एहमीयत समझें. दूसरी ओर सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इस कोशिश में लगे हैं कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव में सुलह हो जाए.

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