छठे चरण में चली सपा-बसपा की आंधी?, ये रहा इन सीटों का हाल…

लखनऊ: लोकसभा चुनाव को लेकर छठे चरण का मतदान पूरा हो गया है. इस चरण में उत्तर प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ है. ये सभी सीटें पूर्वी उत्तर प्रदेश में हैं. दिलचस्प बात ये है कि इनमें से 13 सीटें पिछली बार भाजपा के पास थीं जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी जीती थी. इस तरह से देखें तो महागठबंधन के पास में पिछली बार एक सीट थी. ये सीट भी आज़मगढ़ की सीट थी जहां से मुलायम सिंह यादव चुनाव ल’ड़े थे.

ये 14 सीटें इस प्रकार हैं- सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, इलाहाबाद, अम्बेडकर नगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संत कबीर नगर, लालगंज, आज़मगढ़, जौनपुर, मछलीशहर और भदोही. इन सीटों पर जो अब रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक़ सुल्तानपुर में भाजपा की क़द्दावर नेत्री मेनका गांधी की स्थिति अच्छी नहीं है. वहीँ आज़मगढ़ से दिनेश लाल यादव निरहुआ भाजपा के टिकट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुक़ाबला करने उतरे हैं लेकिन यहाँ सपा कार्यकर्ताओं में ज़बरदस्त उत्साह रहा.

सपा के अलावा बसपा कार्यकर्ता भी उसी तरह उत्साहित नज़र आये. सपा-बसपा के सूत्र कह रहे हैं कि अखिलेश यादव यहाँ से बड़ी जीत हासिल करेंगे. इलाहाबाद से भाजपा नेत्री रीता बहुगुणा जोशी की स्थिति कमज़ोर बतायी जा रही है वहीँ अम्बेडकरनगर की सीट पर भी भाजपा संघर्ष करती ही नज़र आ रही है. डुमरियागंज से जगदम्बिका पाल ज़रूर ऐसी स्थिति में लग रहे हैं कि वो इस चरण में भाजपा का खाता खोल सकते हैं लेकिन यहाँ भी उनकी राह आसान नहीं है.

श्रावस्ती सीट पर भी कुछ इसी तरह के हाल हैं. यहाँ भी गठबंधन के पक्ष में एकतरफ़ा माहौल बनने की ख़बर है. इन सभी सीटों में अगर मोटा-मोटी देखें तो सपा-बसपा को यादव, दलित और मुसलमान वोट बड़ी संख्या में मिला है. कुछ अन्य ओबीसी जातियों के वोट भी महागठबंधन के पक्ष में आये हैं. ब्राह्मण और ठाकुर पहले की तरह भाजपा में नहीं गए हैं लेकिन इनका कुछ हिस्सा भाजपा को मिला है वहीं बाक़ी अगड़ी जातियों में कई जातियों के वोट बड़ी संख्या में भाजपा को मिले हैं.

इस वजह से ऐसे अनुमान लग रहे हैं कि भाजपा के लिए इस बार राह मुश्किल हो गई है. क्षेत्रीय जानकारो की माने तो भाजपा यहाँ 14 की 14 सीटें भी हार सकती है. भाजपा को ख़ुद भी इस चरण में बहुत उम्मीद नहीं नज़र आ रही है. पार्टी कार्यकर्ताओं में वो उत्साह नज़र नहीं आ रहा है जो पिछली बार था जबकि दूसरी ओर सपा-बसपा समर्थक पूरे जोश में हैं. इस चरण में कांग्रेस किसी तरह का कोई प्रभाव डालने की स्थिति में नहीं नज़र आयी.