आज़म ख़ान के परिवार के लिए सपा ने चला बड़ा दाँव, एक ही सीट से आज़म ख़ान की बीवी को भी..

लखनऊ: उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपने विरोधियों को चौंकाने के लिए बड़ा क़दम उठाया है. सपा के इस क़दम से विरोधियों के साथ साथ कई विश्लेषक भी चौंक गए. असल में सपा ने आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म और उनकी पत्नी तन्जीन फ़ातिमा को एक ही सीट से चुनावी मैदान में उतारा है.

दोनों ने स्वार विधानसभा से पर्चा दाख़िल किया है. ऐसा माना जा रहा है कि ये विरोधियों के लिए सस्पेंस बनाने जैसी बात हो गई है. पार्टी किसका नामांकन वापिस कराएगी इस पर विरोधियों में संशय है. वहीं जब इस पर सपा से पूछा गया तो पार्टी के प्रवक्ता अब्बास हैदर ने कहा कि ये भाजपा की साज़िशों की वजह से उठाया गया क़दम है.

उन्होंने कहा,”हमने देखा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली सरकार ने रामपुर का विकास करने वाले एक पूर्व मंत्री को बकरी और साइकिल चोरी के तुच्छ मामलों में फंसाया है. वे हमारे उम्मीदवारों के नामांकन में भी हेर-फेर कर सकते हैं और राजनीतिक प्रतिशोध के कारण उनके चुनाव लड़ने पर अडंगा लगा सकते हैं.”

अब्बास हैदर ने कहा कि सपा चुनावों में उत्तर प्रदेश से बीजेपी और उसके ‘जंगल राज’ को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. सपा के उम्मीदवारों की सूची के मुताबिक स्वार सीट से मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान उम्मीदवार हैं. उत्तर प्रदेश में सात चरणों में होने वाले चुनाव के दूसरे चरण के दौरान 14 फरवरी को स्वार में मतदान होना है.

जालसाजी और जमीन हड़पने के मामलों सहित कई आरोपों के तहत मामला दर्ज होने के बाद आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे ने 2020 में रामपुर की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था. फातिमा को 2020 में जमानत मिल गई, मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को इस साल जनवरी में लगभग दो साल की जेल की सजा के बाद रिहा कर दिया गया. वहीं, आठ बार के विधायक और लोकसभा सदस्य आजम खान जेल में हैं.

बता दें कि आजम खान ने 2017 के चुनावों में रामपुर विधानसभा सीट से 47 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करके जीत हासिल की थी. बाद में वह 2019 में लोकसभा के लिए चुने गए और उपचुनाव में फातिमा रामपुर सीट से विधायक बनीं. उनके बेटे अब्दुल्ला ने 2017 में अपने पहले चुनाव में स्वार विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी.

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