दिल्ली के जहाँगीरपुरी में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि 14 दिन तक यथास्थिति को बरक़रार रखा जाए. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले ने वहाँ रह रहे ग़रीब लोगों को थोड़ी राहत दी है. इस बीच ऐसी उम्मीद है कि आज बड़ी संख्या में राजनीतिक लोग इस इलाक़े का दौरा करेंगे. ऐसे में यहाँ भारी सुरक्षा बल मौजूद है.

दिल्ली नगर निगम की तरफ से की जा रही इस कार्यवाई पर इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठाया जा रहा है. उत्तरी नगर निगम इस पर सफ़ाई दे रहा है कि टाइमिंग की बात नहीं है क्यूँकि ऐसी कार्यवाई चलती रहती है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है. निगम की इस विवादित कार्यवाई के ख़िलाफ़ पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दावे ने पूरे देश में हो रही बुलडोज़र कार्यवाई पर दलील रखी.

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील रखी है कि दिल्ली में 731 कॉलोनियां हैं जिसमें लाखों लोग रहते हैं लेकिन निगम ने एक ही कॉलोनी चुना क्योंकि आपने एक समुदाय को टारगेट किया। दुष्यंत दवे ने दलील रखी कि जिस शोभायात्रा को इजाजत भी नहीं थी उसे पुलिस ने कैसे निकलने दिया। बिना जांच शुरू हुए लोगों को गिरफ्तार किया गया और निगम ने सुबह 9:00 बजे से पहले ही बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी।

दवे ने ये भी कहा कि यह सिर्फ जहांगीरपुर तक ही सीमित नहीं है ये हमारे सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार है। दवे ने कहा कि जहांगीरपुरी में लोगों ने 30 साल से भी पुराने घर और दुकान हैं। हम एक सांविधानिक समाज में रहते हैं। इन सबकी इजाजत कैसे दी जा सकती है। इस बेंच ने दवे से यह कहा कि आप अतिक्रमण वाले मामले तक ही सीमित रहिए और ये बताइए कि नोटिस जारी करने के क्या प्रावधान हैं।

कोर्ट के पूछने पर वकील दवे ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए धारा 343 के तहत 5 से 15 दिन का नोटिस मिलना चाहिए था। ऐसे मामलों में कई बार कोर्ट ने नोटिस की मियाद को बढ़ाया है। लोगों को बिना नोटिस के नहीं हटाया जा सकता। यह उनके राइट टू लाइफ का उल्लंघन है। दुष्यंत दवे की बात सुनने के बाद अदालत ने कहा कि हम आपकी याचिका की सुनवाई करते हुए पूरे देश में अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई आदेश नहीं दे सकते। आपको अपनी दलील में जहांगीरपुरी तक सीमित रहना होगा।

दवे ने अपनी दलील में ये भी कहा कि यह कार्रवाई आनन-फानन हुई और वो भी भाजपा अध्यक्ष द्वारा मेयर को पत्र लिखने के बाद। दवे ने बताया कि सुबह 9 बजे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई थी और अदालत का आदेश आने के बाद भी कार्रवाई जारी रही। कपिल सिब्बल ने भी मामले में दलील रखते हुए कहा कि, अतिक्रमण और अवैध निर्माण पूरे देश की समस्या है। लेकिन इसकी आड़ में एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं।

मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा कि अगर मुसलमान शांत नहीं हुए तो कोई रियायत नहीं दी जाएगी। कोर्ट को यह संदेश देना चाहिए कि यहां कानून का शासन है। अदालत ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद कहा है कि हम अब इस मामले में दो हफ्ते बाद सुनवाई करेंगे और तब तक जहांगीरपुरी में यथास्थिति बरकरार रखनी होगी।

अदालत ने यह भी साफ किया कि उनका यह आदेश सिर्फ जहांगीरपुरी के लिए है न कि देश के दूसरे हिस्सों के लिए। अगर तब तक निगम ने जहांगीरपुरी में कोई कार्रवाई की तो उसे अदालत गंभीरता से लेगी और इससे अवमानना माना जाएगा।