समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को लेकर बड़ी ख़बर सामने आ रही है. आज़म ख़ान को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम ज़मानत दे दी है. इसके साथ ही अब उम्मीद है कि आज़म जेल से बाहर आ जाएँगे. आज़म ख़ान सीतापुर जेल में बंद हैं और उन पर कुल 88 मुक़दमे दर्ज हैं. उनको 87 मुक़दमों में ज़मानत मिल चुकी थी और एक मामले में ज़मानत मिलना बाक़ी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी लगातार दर्ज हो रहे केसेस पर संज्ञान लिया था और कहा था कि एक केस में ज़मानत मिलते ही दूसरा केस कैसे दर्ज हो जाता है. आपको बता दें कि सपा नेता और अन्य विपक्षी दल ये कहते रहे हैं कि आज़म के ख़िलाफ़ ये मुक़दमे उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा बदले की कार्यवाई से किए जा रहे हैं.

इसके पहले कल समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान की ज़मानत पर सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में हुई थी और उन्हें 87वें केस में ज़मानत मिल गई थी. तब ये ख़बर थी कि उन्हें एक और मामले में ज़मानत लेनी होगी. उनकी गिनती समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में की जाती है. यूपी में बीजेपी के सत्‍ता में आने के बाद आजम के खिलाफ जमीन पर अवैध कब्‍जे और अन्‍य केस दर्ज किए गए हैं.

आज़म के क़रीबी लोगों का मानना है कि ये सभी केस द्वेष की कार्यवाई के तहत किए गए हैं. आज़म ख़ान समर्थकों का कहना है कि इस तरह के केस बनाए गए हैं कि उनकी रिहाई में देर होती रहे. आज़म की रिहाई न हो पाने को लेकर कई बड़े दल आवाज़ उठाते रहे हैं. इसमें समाजवादी पार्टी तो है ही लेकिन बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का भी मानना है कि आज़म को ज़बरदस्ती जेल में रखा जा रहा है.

आज़म के समर्थन में पिछले हफ़्ते बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्षा और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा,”यूपी व अन्य बीजेपी शासित राज्यों में भी, कांग्रेस की ही तरह, जिस प्रकार से टारगेट करके गरीबों, दलितों, अदिवासियों एवं मुस्लिमों को जुल्म-ज्यादती व भय आदि का शिकार बनाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है यह अति-दुःखद, जबकि दूसरों के मामलों में इनकी कृपादृष्टि जारी है।”

वो आगे लिखती हैं,”इसी क्रम में यूपी सरकार द्वारा अपने विरोधियों पर लगातार द्वेषपूर्ण व आतंकित कार्यवाही तथा वरिष्ठ विधायक मुहम्म्द आज़म खान को करीब सवा दो वर्षों से जेल में बन्द रखने का मामला काफी चर्चाओं में है, जो लोगों की नज़र में न्याय का गला घोंटना नहीं तो और क्या है? साथ ही, देश के कई राज्यों में जिस प्रकार से दुर्भावना व द्वेषपूर्ण रवैया अपनाकर प्रवासियों व मेहनतकश समाज के लोगों को अतिक्रमण के नाम पर भय व आतंक का शिकार बनाकर, उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है, वह अनेकों सवाल खड़े करता है जो अति-चिन्तनीय भी है।”