सुप्रीम कोर्ट ने कई दशक पुरानी मस्जिद को इस वजह से गि’राने का सुनाया फैसला, जमीयत ने कहा एक भी ईट….

December 30, 2021 by No Comments

Islamabad : पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अवै’ध क’ब्जा ह’टाने को लेकर लगातार ऐसे फैसले आ रहे हैं कि लोगों ने सवा’ल उठाना शुरू कर दिया है आपको बता दें पिछले दिनों कराची में मौजूद नस्ला टावर को भी गिरा’ने का आदेश दिया गया था कोर्ट ने कहा था कि यह बिल्डिंग अवै’ध जमीन पर बनाई गई है अब लोगों को सवाल है जब बिल्डिंग बन रही थी उस वक्त कोर्ट क्या कर रहा था वह कौन लोग थे जो इसको बनाने की परमिशन दी थी जब वहां लोग रहने लगे उसके बाद उसको गिराने की का’र्रवाई की जा रही है

इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने एक और फैसला सुनाया मदीना मस्जिद को लेकर जो तारिक रोड पर मौजूद है उस मस्जिद के बारे में बताया जा रहा है 41 साल पुरानी है सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह मस्जिद पार्क की जमीन पर बनी है वहीं एक दूसरी मस्जिद अल फतह के बारे में भी सुप्रीम कोर्ट ने यही फैसला सुनाया है उसने कहा है कि यह जमीन सरकारी है आपको बता दें इस मस्जिद की परमिट को ही सुप्रीम कोर्ट ने र’द्द कर दिया ।

वहीं पाकिस्तान की धार्मिक पार्टी जमीयत उलमा इस्लाम के सिंध के जनरल सेक्रेटरी मौलाना राशिद महमूद सुमरो ने अपने व्हाट्सएप ऑडियो पैगाम के जरिए धम’की देते हुए कहा है किसी की हि’म्मत है तो मस्जिद को हाथ लगा कर देखें उन्होंने साफतौर पर कहा अगर मस्जिद सला’मत नहीं रही तो आप के दफ्तर भी स’लामत नहीं रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के कराची रजिस्ट्री में मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कल कराची में किडनी हिल पार्क में अल-फतेह मस्जिद और तारिक रोड पर मदी’ना मस्जिद सहित दो मस्जिदों के निर्माण पर’मिट को रद्द कर दिया था। उन्होंने जमीन पर बनी इन दोनों मस्जिदों को हटा’ने  का आदेश दिया था ।

वहीं जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के केंद्रीय नेता और कराची के केमाड़ी जिले के अमीर कारी मुहम्मद उस्मान ने कहा है कि मदीना मस्जिद तारिक रोड का हर हाल में बचा’व किया जाएगा उन्होंने कहा, ”हम अपनी जा’न दे सकते हैं, मस्जिद की एक भी ईंट नहीं गि’रने देंगे.” सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा जब एक बार मस्जिद बन जाती है तो क्या मत तक मस्जिद ही रहती है जब अवे’ध जमीन पर बनी बिल्डिंग रेगुलर हो सकती है तो फिर मस्जिद क्यों नहीं उन्होंने कहा 1980 से यहां मस्जिद बनी हुई है यहां पर कोई मस्जिद नहीं थी तो तारिक रोड के लोगों ने मस्जिद बनाने का काम शुरू किया हर साल उसके अपडेट होती रही और मस्जिद के तमाम खर्चे रजिस्टर्ड कंपनी के जरिए अदा किया जाता रहा ।

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