आगरा स्थित ताजमहल जोकि पूरी दुनिया में मुहब्बत का प्रतीक माना जाता है. ये सभी जानते हैं कि ताजमहल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बनवाया था. ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शुमार किया जाता है और देखने वाले इसे देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. सफ़ेद संगमरमर से बनी ये इमारत ख़ूबसूरती का एक नायाब नमूना है.

ताजमहल के साथ कोई भी ऐसी बात नहीं जिसे कहा जाए कि ये विवादित है. कहने सुनने वालों ने इस इमारत की तारीफ़ में क़सीदे पढ़ते पढ़ते इस तरह की एक बात लोगों तक पहुँचा दी कि शाहजहाँ ने उन मज़दूरों के हाथ कटवा दिए थे जिन्होंने ताजमहल बनाया था. ये बात पूरी तरह झूठी है और मनगढ़ंत है. उस्ताद अहमद लाहौरी इसको बनाने वाले आर्किटेक्ट थे.

ताजमहल जिन लोगों ने बनाया उनको शाहजहाँ ने सम्मानित किया और ये नायाब इमारत यमुना के किनारे रिनेसा की ख़ूबसूरत पेंटिंग की तरह दिखती है. अब सोचिए कि सभी ताजमहल की मुहब्बत को निहारें उसे प्यार करें तो कुछ तो ऐसे भी लोग होंगे जो इससे जलन करेंगे. जी हाँ, कुछ जलनखोर पहुँच गए अदालत अपनी कुछ इसी तरह की जलन लेकर.

कहते हैं ख़ाली दिमाग़ शैतान का घर, तो कुछ इसी तरह के खलिहर लोग पहुँच गए अदालत और एक याचिका डाल दी कि ताजमहल में बंद 22 कमरों को खुलवाया जाए. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इसकी सुनवाई हुई और सुनवाई में अदालत ने इन लोगों को जमकर फटकार लगाई. सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह अपनी याचिका तक ही सीमित रहें.

अदालत ने कहा कि आज आप ताजमहल के कमरे देखने की मांग कर रहे हैं कल को आप कहेंगे कि हमें जज के चेंबर में जाना है. अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह जाएं और एमए, नेट जेआरएफ करें और उसके बाद शोध में ऐसा विषय चुनें. फिर अगर कोई संस्थान उन्हें यह शोध करने से रोके तो हमारे पास आएं.

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस डीके उपाध्याय और सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने मामले की सुनवाई की. अदालत में सुनवाई में याचिकाकर्ता रजनीश सिंह के वकील ने कहा कि देश के नागरिकों को ताजमहल के बारे में सच जानने की जरूरत है. याचिकाकर्ता ने कहा- मैं कई आरटीआई लगा चुका हूं. मुझे पता चला है कि कई कमरे बंद हैं और प्रशासन की ओर से बताया गया कि ऐसा सुरक्षा कारणों की वजह से किया गया है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर कोई चीज़ ताजमहल में छिपाई गई है तो उसकी जानकारी जनता को होना चाहिए. वहीं वकील ने कहा कि मैंने औरंगजेब की एक चिट्ठी देखी है जो उसने अपने अब्बा को लिखी थी. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी याचिका तक ही सीमित रहे. आप दरवाजे खोलने के लिए आदेश मांग रहे हैं. आप एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की मांग कर रहे हैं.

इसके जवाब में यूपी सरकार के वकील ने भी अपना जवाब दिया और कहा कि इस मामले में आगरा में पहले से ही मुक़दमा दर्ज है और याचिकाकर्ता का इस पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है. वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि मैं इस तथ्य पर बात ही नहीं कर रहा कि वह जमीन भगवान शिव से जुड़ी है या अल्लाह से. मेरा मुख्य मुद्दा वो बंद कमरें हैं और हम सभी को जानना चाहिए कि आखिर उन कमरों के पीछे क्या है.

इसके बाद दो न्यायाधीशों की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि जाइए एमए करिए और उसके बाद ऐसा विषय चुनिए. अगर कोई संस्थान आपको रोकता है तो हमारे पास आइए. अदालत ने पूछा कि आप किससे सूचना मांग रहे हैं? इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रशासन से. इस पर कोर्ट ने कहा- अगर वो कह चुके हैं कि सुरक्षा कारणों से कमरे बंद हैं तो वही सूचना है. अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो इसको चुनौती दीजिए. आप एमए करिए और फिर नेट, जेआरएफ करिए और अगर कोई यूनिवर्सिटी आपको इस विषय पर शोध करने से रोके तो हमारे पास आइए.

अदालत ने कहा कि क्या आप मानते हैं कि ताजमहल शाहजहां ने नहीं बनावाया? क्या हम यहां कोई फैसला सुनाने आए हैं कि इसे किसने बनवाया या ताजमहल की उम्र क्या है? आप हमें उन ऐतिहासिक तथ्यों को बताएं जिन्हें आप मानते हैं. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी याचिका तक ही सीमित रहे. आप दरवाजे खोलने के लिए आदेश मांग रहे हैं. आप एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की मांग कर रहे हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा कि हमें उन कमरों में जाने की अनुमित दीजिए. इस पर कोर्ट ने तंज कसा कि कल को आप कहेंगे हमें माननीय न्यायाधीशों के चेंबर में जाना है. कृप्या पीआईएल सिस्टम का मजाक मत बनाइए. याचिकाकर्ता ने कहा कि मुझे थोड़ा वक्त दें, मैं इस पर कुछ फैसले दिखाना चाहता हूं. इस पर अदालत ने कहा कि यह याचिका मीडिया में चर्चा का विषय बनी हुई है और अब आप ये सब कर रहे हैं. इस मुद्दे पर आप मेरे घर आइए और हम इस पर बहस करेंगे लेकिन अदालत में नहीं. इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 2 बजे तक का समय दिया है.