तीन आरोपियों को बरी कर कोर्ट ने पुलिस को किया शर्मसार, कहा- इतिहास में दर्ज होगी…

September 3, 2021 by No Comments

दिल्ली दं’गे के मामले में अदालत पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए शुरू से ही नाराज़ दिख रही थीं यही नही बल्कि कई बार पुलिस को झाड़ भी पि’लाई गई लेकिन गुरुवार को कोर्ट ने ऐसी टिप्पणी की जो दिल्ली पुलिस को हमेशा याद रहेगी कोर्ट ने तीन आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि दिल्ली दं’गे में पुलिस की विवेचना का तरीका इतिहास में एक काले अध्ययाय की तर्ज पर दर्ज होगा कोर्ट ने बीते साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दं’गों से जुड़े एक मामले की जांच को लेकर पुलिस को कड़ी फ’टकार लगाई है।

वही सोशल मीडिया में पुलिस की कार्यशैली पर लोग सवाल उठा रहे हैं जब पुलिस ही एक विपक्ष के तौर पर काम करेगी तो लोगों को इंसाफ कैसे मिलेगा पुलिस का काम था दंगा रोकना लेकिन पुलिस ने ही फर्जी तरीके से मुसलमानों को फसाने के लिए ही काम किया है इस पर अदालत ने भी कड़ी फ’टकार लगाई फैसले के बाद से सोशल मीडिया कोर्ट का फैसला वायरल हो रहा है ।

कोर्ट ने कहा इतिहास विभाजन के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में सबसे भी’षण सां’प्रदायि’क दं’गों को देखेगा तो पुलिस की विफलता हमेशा पीड़ा देगी उनका कहना था कि पुलिस ने जिस तरह से विवेचना की वो श’र्मसार करने वाली है पुलिस को उस वक़्त मुंह की खानी पड़ी जब कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम और दो अन्य आरोपियों काशिद सैफी व शादाब को एक दुकान में लू’टपाट और तो’ड़फोड़ से जुड़े मामले में बरी कर दिया।

अदालत ने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना की कोई ऐसा सीसीटीवी फुटेज नहीं था जिससे आरोपी की घ’टनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि हो सके कोई चश्मदीद गवाह नहीं था और आपराधिक साजिश के बारे में कोई सबूत नहीं था फरवरी 2020 में दिल्ली के चांद बाग इलाके में दंगों के दौरान तीनों को अरेस्ट किया गया था एडीजे यादव ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने मामले में पांच गवाह चश्मदीद के तौर पर पेश किए जिसमे एक खुद पीड़ित था तो दूसरा सिपाही ज्ञान सिंह इसके अलावा ड्य़ूटी अफसर एक औपचारिक गवाह और जांच अधिकारी ही गवाह के तौर पर पेश किए गए ऐसा लगता है कि सीनियर अफसरों ने अपने मातहतों के काम पर नजर ही नहीं डाली।

उन्होंने ये जहमत भी नहीं उठाई कि नीचे वाले क्या और कैसे कर रहे हैं एडीजे ने कहा कि मामले में ऐसा लगता है कि चश्मदीद गवाहों सबूतों का पता लगाने का प्रयास किए बिना ही केवल आरोप पत्र दाखिल करके मामला सुलझा लिया गया कोर्ट ने कहा कि डेढ़ साल से बहुत से लोग केवल इस वजह से जेल में बंद हैं क्योंकि पुलिस सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने में व्यस्त है इनके जेल में रहने के लिए पुलिस ही जिम्मेदार है।

 

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