कोलकाता के इस मु’स्लिम डॉक्टर ने बनाया रिकॉर्ड, सिर्फ 50 रुपए में ही..

July 4, 2020 by No Comments

को’रो’ना वा’य’रस से पिछले साढ़े तीन महीने से पूरे देश में तबा’ही मची हुई है। इसके चलते सभी अस्पतालों में को’रो’ना वा’य’रस के अलावा अन्य बीमा’रियों से पी’ड़ित म’रीज भी काफी परेशानी में चल रहे हैं। को’रो’ना वा’य’रस के अलावा दिल और किडनी की बीमा’री जैसे म’रीजों को को’रो’ना के खौ’फ की वजह से प्राइवेट अस्पतालों से खाली हाथ लौटाया जा रहा है। लेकिन ऐसे में भी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक मु’स्लिम डॉक्टर ने केवल 50 रुपए में ही डायलिसिस करना शुरू कर दिया है। कोलकाता के डॉक्टर फवाद हलीम ने अपने इस फैसले से कई लोगों की जान बचाई है। डॉक्टर के पेशे के अलावा हलीम पिछले साल सीपीएम के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी ल’ड़ चुके हैं और पार्टी के एक्टिव नेता हैं।

बता दें कि डॉक्टर फवाद हलीम पश्चिम बंगाल के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल हलीम के पुत्र हैं और अलीगढ़ मु’स्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटार्यड) जमीरुद्दीन शाह के दामाद हैं। डॉक्टर हलीम ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद से साल 2008 में कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में स्वास्थ्य संकल्प नामक गैर-सरकारी संगठन के बैनर तले अस्पताल खोला था। इस अस्पताल में म’रीजों का डायलिसिस किया जाता है। अस्पताल के शुरुआती दिनों में डायलिसिस का खर्च 500 रुपए था, परंतु अब यह खर्च घटा’कर 350 रुपए कर दिया गया है। लेकिन अब 26 मार्च से डायलिसिस के लिए सिर्फ 50 रुपए लिए जा रहे हैं।

Dr. Fawad Haleem


उनसे सवाल किया गया कि को’रो’ना वा’य’रस के कार’ण जहां अन्य अस्पतालों में ऐसे म’रीजों से मुंह मो’ड़ लिया है, वहां आपने ऐसा फैसला क्यों किया? उन्होंने बताया कि “लॉ’कडा’उन होने के बाद म’रीजों से परिस्थिति के बारे में जानकारी मिली। आवाजाही ठप हो जाने से म’रीज और उनके परिजन भी फंस गए थे। आने-जाने का खर्च काफी बढ़ गया था। म’रीजों की आर्थिक स्थिति और दूसरी दिक्कतों को ध्यान में रख कर ही हमने डायलिसिस का खर्च घटा कर 50 रुपये करने का फैसला किया।” फिलहाल डॉक्टर हलीम के अस्पताल में डायलिसिस करने के लिए नौ मशीनें हैं। रोज़ाना यहां पांच शिफ्टों में काम करके 30 से 35 मरीजों का डायलिसिस होता है।

डॉक्टर हलीम से सवाल किया गया कि यह अस्पताल इतने कम खर्च में यह सेवा कैसे दे रहा है? जिसके जवाब में डॉक्टर का कहना है कि “हमारे अस्पताल में निजी अस्पतालों जैसी आलीशान सुविधाएं नहीं हैं। न तो एयर कंडीशंड वेटिंग लाउंज है और न ही कोई चमकदार कैंटीन। खर्च घटा’ने के लिए हमने अस्पताल में लिफ्ट भी नहीं लगाई है। अस्पताल के तकनीशियन बेहद दक्ष हैं। हमारे काम को देखते हुए डायलिसिस मशीन और दूसरी जरूरी दवाओं की सप्लाई करने वाली कंपनियां हमें बाजार से कम दर में तमाम चीजें मुहैया कराती है। कई लोग इस नेक काम में आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं। इसी से हम म’रीजों का इतने कम पैसो में इलाज कर पाते हैं।” इस अस्पताल में तीन डॉक्टर मुफ्त में काम करते हैं।

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