बेंगलुरु: एक तरफ़ महाराष्ट्र में भाजपा के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो रहा है वहीँ कर्णाटक में भी अब पार्टी के अन्दर मतभेद उभर कर आ रहे हैं. कर्णाटक भाजपा सांसद वी श्रीनिवास प्रसाद अपनी पार्टी से दुखी हैं. उन्होंने कहा कि टीपू सुलतान का मुद्दा इस समय उठाना ग़ैर-ज़रूरी था. प्रसाद ने कहा कि सरकार बना लेने के बाद सौ दिन हो चुके हैं और जिन विधायकों की वजह से ये सरकार बनी थी वो निलंबित हो चुके हैं.

प्रसाद ने आगे कहा कि हमारे पास जब इतनी अधिक समस्याएँ पहले से ही हैं तो टीपू सुलतान के मुद्दे को उठाने की ज़रूरत क्या थी. कर्णाटक में इसके पहले भी ऐसी ख़बर आयी है कि भाजपा में अंदरूनी मतभेद उभर रहे हैं और 15 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में पार्टी कैसा प्रदर्शन करेगी इस पर संशय बना हुआ है. आपको बता दें कि बीएस येदयुरप्पा की सरकार ने टीपू सुलतान का नाम टेक्स्टबुक्स से हटाने का फ़ैसला कर लिया है.

इस फ़ैसले की इतिहासकार भी आलोचना कर रहे हैं और साथ ही इससे ये सन्देश गया है कि भाजपा मुस्लिम कम्युनिटी के वीर को बदनाम करना चाहती है. कर्णाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा ने एक अजीब ओ ग़रीब फ़ैसले में कहा कि हर वो चीज़ वो हटाने जा रहे हैं जो टीपू जयंती से जुड़ी हो और टीपू के बारे में जो कुछ भी टेक्स्टबुक्स में है सब हटाया जाएगा.

आपको बता दें कि टीपू सुलतान ने अंग्रेज़ों से लड़ते हुए शहादत हासिल की थी. उनकी बहादुरी का सम्मान भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में होता है.देश की आज़ादी के संघर्ष में टीपू की भूमिका को भी अहम् माना जाता है. टीपू के शहीद होने के बाद भी देश ने एक लंबा दौर देखा जिसमें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी और बाद में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों का दमन किया.

गांधी जी, भगत सिंह, सुभाष बोस, जैसे महान लोगों ने भारत को ब्रिटिश शासन के चंगुल से आज़ाद कराया. आज़ादी के पहले और आज़ादी के बाद तक कभी किसी ने टीपू सुलतान पर कोई ऊँगली नहीं उठाई लेकिन कर्णाटक की भाजपा सरकार टीपू को हीरो नहीं मानती. कर्णाटक में भाजपा की सरकार टीपू सुलतान जयंती भी नहीं मनाती और साथ ही उनके सम्मान में कोई शब्द नहीं लिखे देखना चाहती.

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