लखनऊ: पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को चौंका कर रख दिया है। दरअसल देश के गृहमंत्री द्वारा विधानसभा चुनाव प्रचार में कई बार दावे किए गए थे कि इस बार भाजपा ही राज्य में चुनाव जीतेगी। लेकिन नतीजों में भाजपा की हार ने साबित कर दिया कि ममता बनर्जी ही बंगाल की असली चैंपियन हैं।

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की सरकार बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने बागी तेवर दिखाने भी शुरू कर दिए हैं। दरअसल चुनाव से पहले जो नेता तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। अब वह वापस ममता बनर्जी के पाले में आने की बात कह रहे हैं।

इसी बीच खबर सामने आई है कि टीएमसी ने 18 भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को ब्लैक लिस्ट कर दिया है और दुकानदारों को भी चेतावनी दी है कि इन्हें कोई भी सामान नहीं देना है। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा दिए गए इस फरमान के काफी आलोचना भी हो रही है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई बड़े नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की ता’नाशाही पर सवाल उठाया है। इस मामले में बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की प्रमुख केया घोष ने शनिवार को ट्विटर पर टीएमसी द्वारा कथित रूप से प्रसारित एक सूची साझा की, जिसमें 18 व्यक्तियों को सूचीबद्ध किया गया था, सभी भाजपा के सदस्य हैं, जिन्हें टीएमसी की अनुमति के बिना कोई भी सामान विशेष रूप से चाय नहीं बेची जानी चाहिए।

टीएमसी द्वारा भाजपा नेताओं को ब्लै’कलिस्ट किये जानें पर हैरानी जताते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बंगाल की मुख्यमंत्री सीएम ममता बनर्जी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल में सभी नागरिकों की रक्षा की जाए। उन्हें ब’हिष्कृत या बुनियादी सुविधाओं से वंचित न किया जाए।

भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि यह ब्लैकलिस्टिंग पुलिस की मिलीभगत का इस्तेमाल कर कार्यकर्ताओं के मनोबल तोड़ने के लिए की गई। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को मोदी सरकार द्वारा वापस दिल्ली बुलाए जाने को लेकर इस वक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच त’नाव चल रहा है।

केंद्र सरकार ने अलपन को दिल्ली बुलाया था लेकिन ममता बनर्जी के कहने पर उन्होंने दिल्ली जाने से इन्कार कर दिया और नौकरी से इस्तीफा दे दिया। अब ममता ने बंदोपध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त किया है।